PFRDA ने 'NPS Swasthya' को आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया है। यह एक ऐसा हाइब्रिड प्रोडक्ट है जो NPS अकाउंट को सुपर टॉप-अप हेल्थ इंश्योरेंस के साथ जोड़ता है, ताकि मेडिकल इमरजेंसी के समय आपकी रिटायरमेंट सेविंग्स सुरक्षित रहें।
PFRDA ने 1 अक्टूबर 2026 को 'NPS Diwas' के मौके पर 'NPS Swasthya' की शुरुआत की है। यह नया मॉडल एक इन्वेस्टमेंट व्हीकल और ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस का मिश्रण है।
यह हाइब्रिड मॉडल कैसे काम करेगा?
इस योजना में एक तरफ आपका इन्वेस्टमेंट अकाउंट है जो मार्केट परफॉर्मेंस के हिसाब से बढ़ता है, तो वहीं दूसरी तरफ एक अनिवार्य सुपर टॉप-अप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि मेडिकल इमरजेंसी के दौरान आपको अपनी जमा-पूंजी न तोड़नी पड़े।
इस प्लान के तहत Aditya Birla Health Insurance प्रोवाइडर है और Medi Assist इसे एडमिनिस्टर करेगा। इसमें सब्सक्राइबर, दो एडल्ट और दो बच्चे कवर होंगे। यह 'सुपर टॉप-अप' मॉडल पर काम करता है, जिसमें ₹10,000 के न्यूनतम डिडक्टिबल (Deductible) से ₹1 लाख तक का कवर मिलता है, जो सम-इंश्योर्ड के आधार पर बढ़ सकता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी और ट्रेड-ऑफ्स
निश्चित रूप से यह एक सहूलियत भरा प्लान है, लेकिन इसमें कुछ चुनौतियां भी हैं।
- लिक्विडिटी का असर: स्कीम आपको मेडिकल खर्चों के लिए अपनी कुल कंट्रीब्यूशन का 25% तक निकालने की इजाजत देती है। हालांकि, ऐसा करने से आपकी रिटायरमेंट कॉर्पस और कंपाउंडिंग का फायदा सीधे तौर पर कम हो जाएगा।
- मार्केट रिस्क: चूंकि अकाउंट का एक हिस्सा मार्केट-लिंक्ड है, इसलिए मेडिकल इमरजेंसी के समय फंड की वैल्यू बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगी, जो एक निश्चित गारंटीड इंश्योरेंस के मुकाबले रिस्की हो सकता है।
इंश्योरेंस की शर्तें
इस स्कीम में 18 से 70 साल की उम्र के लोग एंट्री ले सकते हैं और 85 साल तक इसे रिन्यू कराया जा सकता है। ग्रुप पॉलिसी होने के कारण मेडिकल टेस्ट की बाध्यता कम है, लेकिन प्री-एक्जिस्टिंग बीमारियों के लिए नियम लागू रहेंगे।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की सलाह है कि इस स्कीम में निवेश से पहले आप अपने मौजूदा हेल्थ इंश्योरेंस और NPS अकाउंट के अलग-अलग खर्चों की तुलना जरूर करें, ताकि आप बेहतर निर्णय ले सकें।
