नतीजों ने भरी उड़ान
Power Finance Corporation (PFC) के शेयर सोमवार को करीब ₹408.60 पर कारोबार करते हुए 2.01% चढ़े। यह उछाल कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजों के दम पर आया है। दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तिमाही में, PFC का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹29,094.81 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹26,798.04 करोड़ से अधिक है। इसी तरह, इस अवधि में नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹8,211.90 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹7,759.56 करोड़ था। कंपनी की कमाई प्रति शेयर (EPS) भी ₹17.66 से बढ़कर ₹19.07 हो गई।
फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) मार्च 2025 के पूरे साल के प्रदर्शन में भी जबरदस्त ग्रोथ दिखी है। इस दौरान रेवेन्यू ₹106,501.62 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹30,514.65 करोड़ रहा, जिससे EPS ₹69.67 दर्ज किया गया। शेयरधारकों को तोहफा देते हुए, PFC ने 5 फरवरी 2026 को ₹4.00 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) भी घोषित किया है, जिसकी एक्स-डेट (Ex-date) 20 फरवरी 2026 तय की गई है। इससे पहले कंपनी ने ₹3.65 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड दिया था।
वैल्यूएशन और मार्केट की नजर
PFC का शेयर फरवरी 2026 तक 3.96 से 5.54 के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है। यह वैल्यूएशन इसे 'वैल्यू स्टॉक' की श्रेणी में रखता है और Bajaj Finance (P/E ~33) व Bajaj Finserv (P/E ~32) जैसे हाई-ग्रोथ वाले शेयरों से काफी नीचे है। PFC का मार्केट कैप फरवरी 2026 की शुरुआत में लगभग ₹1.32 लाख करोड़ से ₹1.36 लाख करोड़ के बीच था। इसकी प्रतिस्पर्धी REC Limited का P/E रेश्यो करीब 5.30-5.36 और मार्केट कैप लगभग ₹91,000-98,000 करोड़ है।
एनालिस्ट्स (Analysts) का रुख पॉजिटिव बना हुआ है, उनका 12 महीने का एवरेज प्राइस टारगेट मौजूदा स्तरों से 20% से ज्यादा की बढ़त का संकेत दे रहा है। MarketsMojo ने 3 फरवरी 2026 को PFC की रेटिंग को 'Sell' से 'Hold' कर दिया था, जिसकी वजह बेहतर टेक्निकल और उचित वैल्यूएशन को बताया गया। वहीं, भारतीय NBFC सेक्टर के बारे में अनुमान है कि FY26 में यह 15-17% की दर से बढ़ेगा और मार्च 2026 तक एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹48-50 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।
चिंता की मुख्य वजहें: भारी कर्ज और निगेटिव कैश फ्लो
मजबूत नतीजों और पॉजिटिव मार्केट सेंटीमेंट के बावजूद, PFC की वित्तीय संरचना में कुछ बड़ी चिंताएं बनी हुई हैं। मार्च 2025 तक कंपनी का डेब्ट-टू-इक्विटी (Debt-to-Equity) रेश्यो 8.25 के खतरनाक स्तर पर था। यह भारी भरकम लीवरेज (Leverage) ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव वाले माहौल में मुनाफे और नुकसान दोनों को कई गुना बढ़ा सकता है।
इन चिंताओं को और बढ़ाने वाली बात यह है कि फाइनेंशियल ईयर मार्च 2025 के लिए कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो (Operating Cash Flow) ₹92,269 करोड़ निगेटिव (Negative) रहा। इसका मतलब है कि कंपनी अपने मुख्य ऑपरेशन से इतना कैश जेनरेट नहीं कर पा रही है कि अपने खर्चों को पूरा कर सके। ऐसे में कंपनी को फाइनेंसिंग एक्टिविटीज पर निर्भर रहना पड़ता है, जो लंबे समय में टिकाऊ नहीं है। PFC की ग्रोथ भले ही शानदार दिख रही हो, लेकिन उसका भारी लीवरेज और निगेटिव कैश फ्लो उसके फाइनेंशियल मॉडल की मजबूती और आर्थिक मंदी या फंडिंग की लागत बढ़ने जैसी स्थितियों से निपटने की क्षमता पर सवाल खड़े करता है।
भविष्य का आउटलुक (Future Outlook)
PFC का भविष्य का आउटलुक मिला-जुला है। हालांकि एनालिस्ट्स के प्राइस टारगेट पॉजिटिव हैं, लेकिन अनुमानों के अनुसार अगले तीन सालों में कंपनी के रेवेन्यू में 17.7% प्रति वर्ष और EPS में 3.5% प्रति वर्ष की गिरावट आ सकती है। यह अनुमान मौजूदा मजबूत प्रदर्शन से अलग है, लेकिन लीवरेज से जुड़े जोखिमों के अनुरूप है।
दूसरी ओर, यूनियन बजट 2026-27 NBFC सेक्टर को मजबूत करने पर जोर दे रहा है, जिससे क्रेडिट डिलीवरी और गवर्नेंस में सुधार होगा। सरकार का यह फोकस PFC के लिए एक सपोर्टिव माहौल बना सकता है, लेकिन कंपनी को अपने बड़े कर्ज और कैश फ्लो की चुनौतियों से निपटना होगा ताकि वह सेक्टर की ग्रोथ का पूरा फायदा उठा सके और एनालिस्ट्स के भरोसे पर खरी उतर सके।