PFC, REC Shares: CLSA ने टारगेट घटाए, शेयर **6%** टूटे

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
PFC, REC Shares: CLSA ने टारगेट घटाए, शेयर **6%** टूटे

Power Finance Corporation (PFC) और REC Ltd के शेयरों में आज यानी 10 अगस्त 2026 को भारी गिरावट आई। ग्लोबल ब्रोकरेज CLSA ने दोनों कंपनियों के टारगेट प्राइस (Target Price) घटा दिए हैं, जिसके चलते इन पावर सेक्टर लेंडर्स के शेयरों में **6%** तक की कमजोरी दर्ज की गई।

क्यों गिरी PFC और REC की चाल?

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म CLSA ने Power Finance Corporation (PFC) और REC Ltd दोनों के लिए अपने प्राइस टारगेट (Price Target) कम कर दिए हैं। हालांकि, CLSA ने दोनों कंपनियों की 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस में यह कटौती नियर-टर्म फाइनेंशियल परफॉरमेंस को लेकर बढ़ती सावधानी को दर्शाती है।

पहली तिमाही के नतीजे

बाजार की यह प्रतिक्रिया फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों के बाद आई है, जिसमें प्रदर्शन मिले-जुले संकेत दे रहा था। PFC ने कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (Consolidated Net Profit) ₹8,998 करोड़ दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹8,981 करोड़ की तुलना में लगभग सपाट रहा। रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स (Revenue from operations) में भी मामूली गिरावट देखी गई, जो पिछले साल के ₹28,539.04 करोड़ की तुलना में ₹28,526.86 करोड़ रहा।

लोन ग्रोथ और मार्जिन पर दबाव

CLSA ने दोनों लेंडर्स के लिए लोन ग्रोथ (Loan Growth) में आई कमी को एक बड़ा कंसर्न बताया है। जून तिमाही में, PFC ने 4% का ईयर-ऑन-ईयर (YoY) लोन ग्रोथ दर्ज किया, जबकि REC का ग्रोथ 1% पर काफी धीमा रहा। ब्रोकरेज का मानना है कि इस धीमी ग्रोथ की एक बड़ी वजह Revolving Bill Payment Facility (RBPF) स्कीम में आई कमी है, जो पहले उनके लोन बुक का बड़ा हिस्सा थी। अब RBPF बुक REC के कुल लोन का केवल 3% रह गया है।

इसके अलावा, मार्जिन पर भी दबाव देखने को मिला। लोअर लेंडिंग यील्ड (Lower Lending Yields) के कारण कोर मार्जिन में क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर (QoQ) हल्की कमी आई। REC ने फॉरेन एक्सचेंज लॉस (Foreign Exchange Loss) भी दर्ज किया, जिसे ब्रोकरेज ने रुपये के अवमूल्यन (Depreciation of Rupee) का नतीजा बताया। इन चुनौतियों को देखते हुए, CLSA ने चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए PFC और REC दोनों के Profit After Tax (PAT) अनुमानों को 2-3% तक कम कर दिया है।

मर्जर की प्रक्रिया

निवेशकों को इन दोनों कंपनियों के मर्जर (Merger) की चल रही प्रक्रिया को भी ध्यान में रखना चाहिए। PFC में REC के अवशोषण (Absorption) की स्कीम को जून 2026 में बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है। यह स्ट्रक्चरल ट्रांजिशन (Structural Transition) ऑपरेशनल कॉम्प्लेक्सिटी (Operational Complexity) को बढ़ाता है, क्योंकि मैनेजमेंट टीम अपने बिजनेस मॉडल और एसेट पोर्टफोलियो को इंटीग्रेट करने पर फोकस कर रही है।

आगे क्या देखें?

भविष्य में, निवेशकों के लिए मुख्य रूप से नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margins) की स्थिरता और RBPF स्कीम की कमी को अन्य क्रेडिट माध्यमों से बदलने की कंपनियों की क्षमता पर नजर रखनी होगी। इसके अतिरिक्त, चल रहे मर्जर की इंटीग्रेशन प्रोग्रेस (Integration Progress) लॉन्ग-टर्म स्टेकहोल्डर्स के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.