PFC Profit Surge: लागत कटौती का कमाल! PFC का नेट प्रॉफिट **3%** बढ़ा, शेयरहोल्डर्स को ₹3.95 डिविडेंड

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AuthorNeha Patil|Published at:
PFC Profit Surge: लागत कटौती का कमाल! PFC का नेट प्रॉफिट **3%** बढ़ा, शेयरहोल्डर्स को ₹3.95 डिविडेंड
Overview

सरकारी कंपनी Power Finance Corporation (PFC) ने मार्च तिमाही के लिए अपने नतीजे घोषित कर दिए हैं. कंपनी ने **₹8,598 करोड़** का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले **3%** ज़्यादा है. यह ग्रोथ मुख्य रूप से ऑपरेटिंग खर्चों में की गई कटौती के चलते संभव हुई, जिसने आय में आई मामूली गिरावट को सहारा दिया.

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लागत में कटौती ने बढ़ाई PFC की कमाई

Power Finance Corporation (PFC) ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे पेश किए हैं. कंपनी का नेट प्रॉफिट 3% बढ़कर ₹8,598 करोड़ पर पहुंच गया. इस बढ़ोतरी का श्रेय कंपनी की लागत कम करने की रणनीति को जाता है. जहां एक ओर कुल आय थोड़ी घटकर ₹28,857 करोड़ रही, वहीं खर्चों में की गई कमी ने मुनाफे को सहारा दिया.

हालांकि, कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 10.5% की गिरावट आई और यह ₹10,833 करोड़ पर आ गई. इसके बावजूद, PFC के बोर्ड ने शेयरधारकों को ₹3.95 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने की सिफारिश की है.

PFC का वैल्यूएशन: क्या महंगे हैं शेयर?

मई 2026 के मध्य तक PFC का मार्केट कैप करीब ₹1.45 ट्रिलियन था. कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो लगभग 5.8-6.1x के बीच है. यह वैल्यूएशन REC Ltd (P/E ~5.5-5.8x) के करीब है, लेकिन IREDA (P/E ~18-20x) से काफी कम है. PFC का मौजूदा P/E रेश्यो इसके 10 साल के औसत से 76% ज़्यादा है. ऐतिहासिक रूप से, PFC के P/E रेश्यो 10x से भी ऊपर जाते रहे हैं, ऐसे में कुछ एनालिस्ट इसे मौजूदा वैल्यूएशन पर 'काफी महंगा' मान रहे हैं.

NBFC सेक्टर में बदलाव और PFC की भूमिका

भारत का NBFC सेक्टर बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहा है. बजट 2026-27 में सरकारी कंपनियों के कंसॉलिडेशन (एकिकरण) पर जोर दिया गया है, जिसमें PFC और REC जैसे बड़े खिलाड़ी शामिल हैं. इस पहल का मकसद क्रेडिट एक्सेस बढ़ाना, टेक्नोलॉजी को अपनाना और सरकारी समर्थित मजबूत लेंडर्स तैयार करना है. NBFC सेक्टर के FY26 में 15-17% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो बैंक क्रेडिट ग्रोथ से ज़्यादा है. PFC जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसर्स को सरकारी खर्चों का फायदा मिलने की उम्मीद है. वहीं, 2026 की शुरुआत में RBI द्वारा रेट कट (ब्याज दरें कम करना) शुरू होने की उम्मीद से NBFCs की फंडिंग कॉस्ट कम हो सकती है, जिससे उनके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) में सुधार आ सकता है.

एनालिस्ट्स की चिंताएं और चुनौतियाँ

मुनाफे में 3% की बढ़ोतरी के बावजूद, PFC के सामने कुछ चुनौतियाँ भी हैं. एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है, कुछ 'Sell' की सलाह दे रहे हैं, तो कुछ 'Strong Buy' की. नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 10.5% की गिरावट फंडिंग कॉस्ट बढ़ने या एसेट क्वालिटी में संभावित दबाव का संकेत देती है, हालांकि कंपनी के ग्रॉस NPA 1.09% और नेट NPA सिर्फ 0.07% हैं. नवंबर 2024 में PFC ने Shapoorji Pallonji Group के ₹200 बिलियन के लोन की मांग को यह कहकर ठुकरा दिया था कि वह उस सेक्टर से परिचित नहीं है, जो भविष्य में विस्तार को सीमित कर सकता है.

भविष्य की उम्मीदें और निवेशकों के लिए आकर्षण

एनालिस्ट्स PFC के लिए मिले-जुले अनुमान जता रहे हैं. 1-साल के प्राइस टारगेट ₹454.5 से लेकर ₹1011.61 तक हैं. सरकार द्वारा NBFC कंसॉलिडेशन को बढ़ावा देने की नीति PFC जैसी बड़ी कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, जिससे स्केल बढ़ेगा और बरोइंग कॉस्ट कम हो सकती है. PFC का लगातार डिविडेंड भुगतान, जिसमें FY26 के लिए ₹3.95 प्रति शेयर का प्रस्तावित डिविडेंड शामिल है, इसे यील्ड चाहने वाले निवेशकों के लिए आकर्षक बनाए रखता है.

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.