PB Fintech: को-पेमेंट पर कंपनी का बड़ा बयान, शानदार Q2 रिजल्ट्स के बाद शेयर में स्थिरता

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AuthorMehul Desai|Published at:
PB Fintech: को-पेमेंट पर कंपनी का बड़ा बयान, शानदार Q2 रिजल्ट्स के बाद शेयर में स्थिरता

Policybazaar के एग्जीक्यूटिव अमित छाबड़ा ने हेल्थ इंश्योरेंस में 'को-पेमेंट' को लेकर बड़ा सुझाव दिया है। वहीं, PB Fintech ने **₹135 करोड़** का दमदार मुनाफा दर्ज किया है, जिसने हालिया रेगुलेटरी अस्थिरता के बाद निवेशकों को राहत दी है।

को-पेमेंट से बदलेगी इंश्योरेंस की तस्वीर?

Policybazaar के हेल्थ इंश्योरेंस वर्टिकल के चीफ बिजनेस ऑफिसर अमित छाबड़ा का मानना है कि हेल्थ इंश्योरेंस में अनिवार्य को-पेमेंट (Co-payment) बाजार की पहुंच बढ़ाने और इसे लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद कर सकता है। छाबड़ा के मुताबिक, यदि मेडिकल खर्च का एक हिस्सा पॉलिसीधारक खुद वहन करते हैं, तो इंश्योरेंस कंपनियां अधिक किफायती प्रीमियम पेश कर पाएंगी। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इसकी सफलता पूरी तरह से पारदर्शिता पर निर्भर करेगी, ताकि मेडिकल इमरजेंसी के दौरान पॉलिसीधारकों को पता हो कि उनकी जेब से कितना खर्च होगा।

फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और बिजनेस मॉडल

यह टिप्पणी कंपनी के शानदार नतीजों के बीच आई है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की दूसरी तिमाही में PB Fintech का नेट प्रॉफिट ₹135 करोड़ रहा है, जो पिछले साल के मुकाबले 165% की जबरदस्त उछाल है। कंपनी का 'एसेट-लाइट' मॉडल इसकी सबसे बड़ी ताकत है। इंश्योरेंस कंपनियों के उलट, PB Fintech कोई पॉलिसी अंडरराइट नहीं करती, जिससे वह रिस्क और इन्वेस्टमेंट की अस्थिरता से बची रहती है।

रेगुलेटरी हलचल और रिकवरी

सितंबर 2026 के अंत में रेगुलेटरी चिंताओं के कारण शेयर में 36% की बड़ी गिरावट आई थी, क्योंकि IRDAI के नए कमीशन कैप्स (Commission Caps) को लेकर बाजार में डर था। हालांकि, अक्टूबर की शुरुआत में कंपनी के शानदार तिमाही नतीजों ने निवेशकों का भरोसा फिर से बहाल किया है।

टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ती मांग

बीमा क्षेत्र में अब बड़ा बदलाव आ रहा है। नया बिजनेस 65% से 70% तक टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहा है। 'Claim Samadhan Diwas' जैसे प्रयासों के जरिए दावों (claims) की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), साइबर और SME इंश्योरेंस जैसे नए क्षेत्रों में भी कंपनी अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।

निवेशकों की नजर कहां है?

फिलहाल निवेशक IRDAI की तरफ से कमीशन और एक्सपेंस मैनेजमेंट पर आने वाली नई गाइडलाइन्स का इंतजार कर रहे हैं। कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी शानदार है, लेकिन आने वाले समय में मार्जिन की स्थिरता इस बात पर टिकी होगी कि कंपनी रेगुलेटरी बदलावों के साथ खुद को कितनी तेजी से ढालती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.