Oriental Insurance Company ने NSE में अपनी **1.42%** हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। इस बिक्री से कंपनी **₹885 करोड़** जुटाएगी, जिसका मकसद अपनी सॉल्वेंसी रेश्यो (Solvency Ratio) को मजबूत करना और हेल्थ व MSME सेक्टर में अपना कारोबार बढ़ाना है।
हिस्सेदारी बिक्री की डिटेल्स
सरकारी बीमा कंपनी Oriental Insurance अपनी NSE में मौजूद हिस्सेदारी का एक हिस्सा बाजार में उतारने जा रही है। कंपनी कुल 49.6 लाख शेयर बेचेगी, जो कुल इक्विटी का 1.42% हिस्सा है। इसके लिए ₹1,875 प्रति शेयर का ऑफर प्राइस तय किया गया है। यह कदम कंपनी को अपने लंबे समय से किए गए निवेश से बड़ा मुनाफा कमाने और फंड जुटाने का मौका देगा।
क्यों जरूरी है यह कदम?
बीमा सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए 'सॉल्वेंसी रेश्यो' बहुत महत्वपूर्ण होता है, जो कंपनी की भविष्य की देनदारियों को पूरा करने की क्षमता को दर्शाता है। इस बिक्री से मिलने वाली रकम से कंपनी की लिक्विडिटी में सुधार होगा और फाइनेंशियल मजबूती बढ़ेगी।
नई रणनीति और फोकस
कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर संजय जोशी के नेतृत्व में Oriental Insurance अब हेल्थ इंश्योरेंस और MSME सेक्टर पर अपना पूरा जोर दे रही है। कंपनी अपनी हेल्थकेयर प्रोवाइडर नेटवर्क को रिस्ट्रक्चर कर रही है ताकि लागत को बेहतर ढंग से मैनेज किया जा सके।
इसके अलावा, कंपनी अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी अपग्रेड कर रही है। अब कंपनी API-आधारित सिस्टम की तरफ बढ़ रही है और साइबर सुरक्षा के लिए एक नया सेंटर भी स्थापित कर रही है। भारत के ग्रामीण इलाकों में इंश्योरेंस की पैठ 2017 में 14.1% थी, जो अब बढ़कर 47.4% तक पहुंच गई है। इस बढ़ते मार्केट को देखते हुए कंपनी अब 'श्योरिटी बॉन्ड मार्केट' (Surety Bond Market) में भी एंट्री कर रही है, जिससे MSME सेक्टर की कॉन्ट्रैक्ट संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सके। हालांकि, बढ़ते क्लेम इन्फ्लेशन (Claim Inflation) को कंट्रोल करना कंपनी के सामने एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
