चेन्नई की NBFC, Orange Retail Finance ने वित्त वर्ष 2027 तक अपना AUM ₹550 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। कंपनी अब टू-व्हीलर लोन से हटकर MSME और गोल्ड लोन पर फोकस कर रही है, जिसके लिए ₹200 करोड़ का NCD और ₹100 करोड़ की को-लेंडिंग पार्टनरशिप की गई है।
विस्तार की नई योजना
चेन्नई स्थित NBFC, Orange Retail Finance अपने कारोबार में एक बड़ा बदलाव कर रही है। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 के अंत तक अपने एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) को ₹550 करोड़ तक पहुंचाना है। इस विस्तार को गति देने के लिए कंपनी ने ₹200 करोड़ का नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) प्रोग्राम शुरू किया है, जिसमें से ₹50 करोड़ का पहला हिस्सा सितंबर 2026 में पूरा हो चुका है। इसके अलावा, Shriram के साथ ₹100 करोड़ की को-लेंडिंग पार्टनरशिप भी की गई है ताकि लिक्विडिटी और लोन बांटने की क्षमता मजबूत हो सके।
पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव
कंपनी अब अपनी पुरानी टू-व्हीलर फाइनेंसिंग की रणनीति से पूरी तरह बाहर निकल रही है। अब फोकस पूरी तरह से गोल्ड लोन और MSME के लिए प्रॉपर्टी पर लोन (LAP) पर है। कंपनी अपनी पूंजी को इन नए और ज्यादा मुनाफा देने वाले सेगमेंट में शिफ्ट कर रही है।
निवेशकों के लिए चेतावनी और नजरिया
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA ने कंपनी को 'ICRA BBB- (Stable)' रेटिंग दी है। हालांकि यह बदलाव ग्रोथ के नए रास्ते खोलता है, लेकिन इसके साथ एसेट क्वालिटी का जोखिम भी जुड़ा है। निवेशकों को कंपनी की क्रेडिट अंडरराइटिंग और कलेक्शन प्रोसेस पर कड़ी नजर रखनी होगी।
भारतीय लेंडिंग सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, निवेशकों को कंपनी के GNPA (Gross Non-Performing Assets) डेटा और 58 शाखाओं के नेटवर्क से मिलने वाले रिटर्न पर नजर रखनी चाहिए। यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी का मैनेजमेंट मार्जिन और कर्ज के बोझ को कैसे बैलेंस करता है।
