Onelife Capital: घाटे में डूबी कंपनी, ₹36 करोड़ का Rights Issue और SEBI का शिकंजा!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Onelife Capital: घाटे में डूबी कंपनी, ₹36 करोड़ का Rights Issue और SEBI का शिकंजा!
Overview

Onelife Capital Advisors Limited ने ₹36 करोड़ का Rights Issue लॉन्च किया है, जिसमें प्रति शेयर ₹15 का भाव रखा गया है। यह फंड मुख्य रूप से सब्सिडियरी Dealmoney Commodities को सपोर्ट करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में ₹487.81 लाख का भारी नेट लॉस दर्ज किया है, जबकि पिछले साल (FY24) यह मुनाफे में थी। इसके साथ ही, कंपनी SEBI की पेनल्टी और प्रमोटर पर लगे बैन जैसी गंभीर रेगुलेटरी मुश्किलों का सामना कर रही है।

📉 कंपनी का वित्तीय हाल

Onelife Capital Advisors Limited एक बड़ा कैपिटल जुटाने की तैयारी में है। कंपनी ₹36 करोड़ का Rights Issue ला रही है, जिसमें वह 2,40,00,000 इक्विटी शेयर ₹15 प्रति शेयर के भाव पर पेश कर रही है। इस पैसे का इस्तेमाल मुख्य रूप से सब्सिडियरी Dealmoney Commodities Private Limited की मार्जिन मनी की जरूरतों को पूरा करने और बाकी का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

लेकिन, कंपनी के पिछले कुछ फाइनेंशियल नतीजे काफी चिंताजनक रहे हैं। मार्च 2025 में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर (FY25) के लिए, कंपनी का टोटल इनकम पिछले साल (FY24) के ₹4,017.06 लाख के मुकाबले 20.88% घटकर ₹3,178.42 लाख पर आ गया। आय में इस गिरावट के चलते कंपनी मुनाफे से सीधे घाटे में आ गई है। FY25 में कंपनी ने ₹487.81 लाख का नेट लॉस दर्ज किया है, जबकि FY24 में ₹63.29 लाख का नेट प्रॉफिट हुआ था। नतीजतन, अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी नेगेटिव हो गया, जो FY25 में ₹(3.65) रहा, जबकि FY24 में यह ₹0.47 था। नेट वर्थ पर रिटर्न (RoNW) भी बुरी तरह गिरा है, जो FY25 में नेगेटिव (13.86)% पर पहुंच गया, जबकि FY24 में यह मामूली 1.24% था।

🚩 खतरे की घंटी और आगे का रास्ता

Onelife Capital Advisors के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द इसके कानूनी और रेगुलेटरी मुद्दे हैं। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) पहले ही कंपनी और उसके प्रमोटर्स पर भारी जुर्माना लगा चुका है और उन्हें सिक्योरिटीज मार्केट से बैन भी कर चुका है। इसके अलावा, लिस्टिंग नियमों के उल्लंघन के कारण कंपनी पर और भी फाइन लगे हैं, और कंपनी को स्टैच्यूटरी ड्यूज (Statutory Dues) चुकाने में देरी का सामना करना पड़ा है।

इन परेशानियों के साथ-साथ, कंपनी के वैधानिक ऑडिटर (Statutory Auditors) ने भी अपनी रिपोर्ट में 'Emphasis of Matters' उठाया है। इसमें इन्वेस्टमेंट्स की रिकवरी (Recoverability) और चल रहे कानूनी मामलों के असर पर चिंता जताई गई है, जो कंपनी की अंदरूनी वित्तीय और ऑपरेशनल कमजोरियों को दर्शाता है।

कंपनी का बिजनेस मॉडल, जो फाइनेंशियल एडवाइजरी, स्ट्रेटेजिक इन्वेस्टमेंट्स और 'Onelifetouch' सुपर ऐप के इंटीग्रेशन पर आधारित है, फिलहाल इन गंभीर जोखिमों से घिरा हुआ है। Rights Issue का फोकस सब्सिडियरी के मार्जिन ट्रेडिंग एक्टिविटीज को सपोर्ट करना यह दिखाता है कि मुख्य व्यवसाय पर दबाव हो सकता है, जिसके लिए कैपिटल इंफ्यूजन की जरूरत पड़ रही है। भविष्य अनिश्चित बना हुआ है, जो पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी अपने रेगुलेटरी मुद्दों से कैसे निपटती है, अपने वित्तीय प्रदर्शन को कैसे सुधारती है, और अपने इन्वेस्टमेंट्स की रिकवरी कैसे सुनिश्चित करती है। निवेशकों को SEBI की अगली कार्रवाई और ऑडिटर की भविष्य की रिपोर्ट्स पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।

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