Ondo Finance, JPM: 5 सेकंड में हुआ खज़ाना सेटल! क्रिप्टो की उथल-पुथल के बीच आई बड़ी एफिशिएंसी

BANKINGFINANCE
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AuthorAditya Rao|Published at:
Ondo Finance, JPM: 5 सेकंड में हुआ खज़ाना सेटल! क्रिप्टो की उथल-पुथल के बीच आई बड़ी एफिशिएंसी
Overview

Ondo Finance ने JPMorgan (JPM) के Kinexys प्लेटफॉर्म, Mastercard और Ripple के साथ मिलकर अपने टोकनाइज्ड U.S. Treasury फंड (OUSG) का क्रॉस-बॉर्डर रिडेम्पशन (Redemption) किया। यह ट्रांजैक्शन **5 सेकंड** से भी कम समय में पूरा हो गया, जो पारंपरिक तरीकों से कहीं ज़्यादा तेज़ है।

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डिजिटल फाइनेंस में बड़ा माइलस्टोन

इस ट्रांजैक्शन की सफलता डिजिटल एसेट्स (Digital Assets) के लिए एक बड़ा कदम है। इसने दिखाया कि कैसे टोकनाइजेशन (Tokenization) के ज़रिए पारंपरिक फाइनेंसियल सिस्टम की देरी को दूर किया जा सकता है। यह स्पीड क्रॉस-बॉर्डर फाइनेंस के भविष्य के लिए एक अच्छी उम्मीद जगाती है, भले ही मौजूदा क्रिप्टो बाज़ार में उतार-चढ़ाव जारी हो।

तेज़ सेटलमेंट ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड

Ondo Finance के इस पायलट में, उनके टोकनाइज्ड U.S. Treasury फंड (OUSG) का सेटलमेंट 5 सेकंड से भी कम समय में हुआ। यह पारंपरिक क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन (Cross-border Transaction) के मुकाबले बहुत बड़ा अंतर है, जिनमें आम तौर पर 1 से 3 बिज़नेस डे लगते हैं। Mastercard के Multi-Token Network और JPMorgan के Kinexys प्लेटफॉर्म पर यह प्रोसेस पूरा हुआ। खास बात यह है कि यह सब सामान्य बैंकिंग घंटों के बाहर हुआ। इस घटनाक्रम के समय, XRP और ONDO जैसे क्रिप्टो एसेट्स पिछले 24 घंटों में लगभग 2% गिरे थे।

इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और बाज़ार की चाल

यह सफल पायलट ऐसे समय में हुआ है जब बड़े संस्थान (Institutions) टोकनाइजेशन पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं। Depository Trust & Clearing Corporation (DTCC) खुद जुलाई 2026 में अपनी टोकनाइजेशन सर्विस लॉन्च करने की योजना बना रहा है। यह सर्विस रसेल 1000 स्टिट्यूएंट्स, ETFs और U.S. Treasuries जैसे लिक्विड एसेट्स को टोकनाइज करेगी। JPMorgan का Kinexys प्लेटफॉर्म अब तक $3 ट्रिलियन से ज़्यादा का ट्रांजैक्शन कर चुका है और इसका लक्ष्य $10 बिलियन प्रतिदिन का है। टोकनाइजेशन मार्केट 2034 तक $15.9 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। हालाँकि, डिजिटल एसेट स्पेस अभी भी काफी वोलेटाइल (Volatile) है। ONDO, हाल की बढ़त के बावजूद, 2025 में 73.38% गिरा था और दिसंबर 2024 में अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा था। XRP में भी हाल के महीनों में गिरावट देखी गई है।

अपनाने में चुनौतियां और सीमाएं

इस ज़बरदस्त एफिशिएंसी (Efficiency) के बावजूद, व्यापक रूप से अपनाने में अभी भी कई बड़ी चुनौतियां हैं। Ondo का OUSG टोकन सिर्फ 'Accredited Investors' और 'Qualified Purchasers' के लिए ही उपलब्ध है, जिससे इसकी पहुंच सीमित हो जाती है। ONDO और XRP जैसे क्रिप्टो एसेट्स की वोलेटिलिटी, पारंपरिक इंस्ट्रूमेंट्स को टोकनाइज करने के लिए उन्हें लॉन्ग-टर्म सेटलमेंट के लिए कम भरोसेमंद बनाती है। इसके अलावा, ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी को पुराने फाइनेंसियल सिस्टम से जोड़ना भी एक तकनीकी चुनौती है। रेगुलेटरी स्पष्टता (Regulatory Clarity) में सुधार हो रहा है, लेकिन यह अभी भी तकनीकी विकास की रफ़्तार से पीछे है, जिससे संस्थानों के लिए अनिश्चितता बनी हुई है।

टोकनाइजेशन का भविष्य

DTCC की आने वाली सर्विस टोकनाइजेशन के लिए बड़े संस्थानों का मज़बूत समर्थन दिखाती है, जिसका मकसद ट्रेडिशनल और डिजिटल फाइनेंस को जोड़ना है। JPMorgan द्वारा Kinexys का विस्तार और प्रतिदिन $10 बिलियन ट्रांजैक्शन का लक्ष्य, स्थापित बैंकिंग में ऑन-चेन फाइनेंस की ओर एक मज़बूत कदम का संकेत देता है। जैसे-जैसे रेगुलेटरी फ्रेमवर्क परिपक्व होंगे और DTCC, Ripple, और Mastercard जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर सहयोग करेंगे, रियल-वर्ल्ड एसेट्स का टोकनाइजेशन और भी ज़्यादा मेनस्ट्रीम (Mainstream) होता जाएगा। यह पायलट एक अहम प्रदर्शन है, जो तेज़ी और एफिशिएंसी के स्पष्ट लाभों को दिखाता है, साथ ही डिजिटल एसेट्स में नई टेक्नोलॉजी और बाज़ार की ताकतों के निरंतर इंटरैक्शन को भी उजागर करता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.