Nuvama Wealth Management ने पहली तिमाही (Q1 FY27) में रिकॉर्ड **₹306 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले **16%** ज्यादा है। कंपनी की क्लाइंट एसेट्स **₹5 लाख करोड़** के पार पहुंच गई हैं, वहीं Nuvama को SEBI से म्यूचुअल फंड बिजनेस शुरू करने की अंतिम मंजूरी भी मिल गई है।
Nuvama Wealth का शानदार आगाज
Nuvama Wealth Management Ltd. ने नए वित्त वर्ष की शुरुआत दमदार की है। जून 2026 तिमाही के लिए कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹305.8 करोड़ हो गया है। यह पिछले साल की इसी तिमाही की तुलना में 16% की बढ़ोतरी है। कंपनी का कुल रेवेन्यू भी 22.6% बढ़कर ₹1,376 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल ₹1,123 करोड़ था।
बिजनेस ग्रोथ और एसेट माइलस्टोन
इस तिमाही की सबसे खास बात यह रही कि कंपनी की कुल क्लाइंट एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹5 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गई, जो तिमाही के अंत में ₹5.36 लाख करोड़ थी। वेल्थ मैनेजमेंट डिवीजन का योगदान ₹3.64 लाख करोड़ रहा, जबकि एसेट सर्विसेज सेगमेंट में 25% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ के साथ ₹1.59 लाख करोड़ दर्ज किए गए। हालांकि, कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 52.6% रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 54.4% मार्जिन से थोड़ा कम है।
स्ट्रैटेजिक विस्तार और नई मंजूरी
अपने मुख्य प्रदर्शन के अलावा, Nuvama को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से म्यूचुअल फंड क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए अंतिम मंजूरी मिल गई है। यह एक बड़ा कदम है क्योंकि यह कंपनी को पारंपरिक वेल्थ मैनेजमेंट और एडवाइजरी फीस के अलावा आय के नए स्रोत बनाने की अनुमति देगा। कंपनी ने निवेशकों से लगभग ₹4,000 करोड़ जुटाने के बाद अपने PRIME कमर्शियल रियल एस्टेट फंड को सफलतापूर्वक बंद कर दिया है।
अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी के तहत, कंपनी अपने टेक्नोलॉजी निवेश को मजबूत करना चाहती है। बोर्ड ने Pickright Technologies में शेष 26% हिस्सेदारी के अधिग्रहण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिससे यह Nuvama की पूरी तरह से स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बन जाएगी। इसके अलावा, बोर्ड ने कंपनी को नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर जारी करके ₹500 करोड़ तक जुटाने के लिए अधिकृत किया है और Nuvama Asset Management Ltd. में ₹100 करोड़ के कैपिटल इन्फ्यूजन के लिए राशि अलग रखी है।
भविष्य के लिए अहम बिंदु
जैसे-जैसे Nuvama म्यूचुअल फंड उद्योग में प्रवेश कर रहा है, निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नया बिजनेस लाइन कैसे निष्पादित होता है और कंपनी के समग्र प्रॉफिट मार्जिन पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है। भारत का वित्तीय सेवा क्षेत्र अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बना हुआ है, जहां पारंपरिक बैंक और नई फिनटेक फर्में वेल्थ मैनेजमेंट और एसेट मैनेजमेंट स्पेस में मार्केट शेयर के लिए होड़ कर रही हैं। नए टेक्नोलॉजी और प्रतिभा अधिग्रहण से जुड़ी लागतों का प्रबंधन करते हुए क्लाइंट एसेट्स में ग्रोथ बनाए रखना कंपनी की दीर्घकालिक लाभप्रदता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
