Bajaj Finance Share: Nomura ने बढ़ाया टारगेट, पर RBI के नए नियमों का मंडराता साया!

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Bajaj Finance Share: Nomura ने बढ़ाया टारगेट, पर RBI के नए नियमों का मंडराता साया!

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Nomura ने Bajaj Finance के लिए अपने टारगेट प्राइस को बढ़ाकर ₹1,270 कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब कंपनी गोल्ड लोन और MSME सेगमेंट में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद कर रही है। हालांकि, RBI के नए ड्राफ्ट नियमों का कंपनी के रिवॉल्विंग क्रेडिट प्रोडक्ट्स पर क्या असर पड़ेगा, इस पर निवेशकों की पैनी नजर है।

RBI के नए नियमों का असर

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने हाल ही में कुछ ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनमें NBFCs को टर्म लोन पर ज्यादा ध्यान देने की सलाह दी गई है। इससे रिवॉल्विंग क्रेडिट प्रोडक्ट्स पर रोक लग सकती है। Bajaj Finance के 'फ्लेक्सी-लोन' प्रोडक्ट, जो रिवॉल्विंग क्रेडिट की तरह ही काम करते हैं, को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ये नियम अभी ड्राफ्ट स्टेज में हैं और रेगुलेटर इंडस्ट्री से फीडबैक ले रहा है। इन संभावित बदलावों की वजह से निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं कि कंपनी की भविष्य की प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी क्या होगी।

ग्रोथ के नए इंजन और भविष्य का अनुमान

इन रेगुलेटरी चिंताओं के बावजूद, Nomura कंपनी की ग्रोथ बनाए रखने की क्षमता को लेकर काफी पॉजिटिव है। फर्म के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि FY27 तक कंपनी का कुल लोन बुक (Assets Under Management - AUM) 24-26% तक बढ़ सकता है। इस भरोसे की वजह कंपनी का सुरक्षित सेगमेंट की ओर स्ट्रैटेजिक झुकाव है, खासकर गोल्ड लोन बिजनेस का विस्तार और MSME (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज) सेक्टर के लिए लोन रिकवरी में उम्मीद।

कंपनी की पिछली परफॉर्मेंस भी इस अनुमान को मजबूत करती है। FY27 की पहली तिमाही में, Bajaj Finance ने अकेले ₹6,081 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 28% ज्यादा है। यह दिखाता है कि कॉम्पिटिटिव माहौल और रेगुलेटरी शोर के बावजूद, कंपनी का कोर बिजनेस सॉलिड प्रॉफिट ग्रोथ दे रहा है।

चुनौतियां और जोखिम

जहां ग्रोथ का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है, वहीं कंपनी को कुछ खास चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। पर्सनल लोन सेगमेंट में कॉम्पिटिशन बढ़ा है, जिसके कारण अर्बन पर्सनल लोन ग्रोथ सालाना 20% से नीचे आ गई है। निवेशकों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखना एक मुश्किल काम है, क्योंकि फंडिंग कॉस्ट बढ़ने से कंपनी द्वारा लोन पर कमाए जाने वाले ब्याज और उधारदाताओं को दिए जाने वाले ब्याज के बीच का अंतर कम हो सकता है।

आने वाले हफ्तों में शेयरधारकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात RBI रेगुलेशन का फाइनल होना होगा। जैसे-जैसे रेगुलेटर इंडस्ट्री की टिप्पणियों की समीक्षा करेगा (फीडबैक विंडो 28 अगस्त, 2026 को बंद हो रही है), बाजार इस बात पर स्पष्टता चाहेगा कि क्या फ्लेक्सिबल क्रेडिट प्रोडक्ट्स का मौजूदा मॉडल नए फ्रेमवर्क के तहत भी कंप्लायंट रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.