वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1FY27) में टॉप NBFCs के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में **20%** से ज़्यादा की ग्रोथ का अनुमान है। हालांकि, बढ़ती उधारी लागत (Borrowing Costs) प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।
NBFCs की AUM में तूफानी तेजी जारी
ब्रोकरेज फर्म Nomura की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1FY27) में लगातार मजबूती दिखा सकती हैं। उम्मीद है कि ज़्यादातर डायवर्सिफाइड NBFCs के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 20% से ज़्यादा की ग्रोथ देखने को मिलेगी।
मार्जिन पर दबाव का खतरा
हालांकि, इस मजबूत लोन ग्रोथ के बावजूद, NBFCs के लिए एक बड़ी चुनौती बढ़ी हुई उधारी लागत (Borrowing Costs) है। Nomura का कहना है कि यह लागत उनके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) यानी लोन से होने वाली कमाई और बैंकों को दिए जाने वाले ब्याज के अंतर पर दबाव डाल सकती है। कंपनी की लागत प्रबंधन क्षमता (Cost Management) निवेशकों के लिए इस तिमाही में एक अहम फोकस पॉइंट रहेगी।
व्हीकल और माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट का हाल
व्हीकल फाइनेंसिंग के क्षेत्र में, ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की दिक्कतें थोड़ी चुनौती पैदा कर सकती हैं। Mahindra & Mahindra Financial Services जैसी कंपनियों के लोन डिस्बर्समेंट में 21% की बढ़ोतरी का अनुमान है, लेकिन कुल मिलाकर यह सेगमेंट बाहरी दबावों का सामना कर सकता है।
वहीं, माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। CreditAccess Grameen जैसी कंपनियों ने अपने लोन एसेट्स में 16% का इजाफा दर्ज किया है। अफोर्डेबल हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों, जैसे Aadhar Housing Finance, से भी लोन और नेट प्रॉफिट में 20% ग्रोथ की उम्मीद है, जबकि एसेट क्वालिटी स्थिर रहने की संभावना है।
निवेशकों के लिए खास बातें
आने वाली तिमाही में निवेशकों के लिए मैनेजमेंट की ओर से उधारी लागत को लेकर की गई कमेंट्री सबसे महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में फोकस रखने वाली कंपनियों के लिए मॉनसून की प्रगति और फर्टिलाइजर (खाद) की उपलब्धता जैसे फैक्टर भी अहम होंगे, क्योंकि ये सीधे तौर पर ग्रामीण कर्जदारों की पेमेंट क्षमता को प्रभावित करते हैं। SME और व्हीकल फाइनेंस पोर्टफोलियो में एसेट क्वालिटी के रुझान पर भी बारीकी से नज़र रखनी होगी। यह भी देखना होगा कि कंपनियां ग्रोथ और वैल्यूएशन के बीच कैसे संतुलन बनाती हैं, क्योंकि इस सेक्टर के कई स्टॉक अपने ऐतिहासिक औसत से प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं।
