ब्रोकरेज फर्म Nomura ने भारतीय बैंकों के लिए जून तिमाही (Q1FY27) के नतीजों का अनुमान जारी किया है। फर्म को उम्मीद है कि बैंकों के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में **12%** की बढ़ोतरी होगी, लेकिन नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर मामूली दबाव रह सकता है। लोन ग्रोथ तो मजबूत दिख रही है, मगर बढ़ी हुई क्रेडिट कॉस्ट के चलते कुल प्रॉफिट ग्रोथ **6%** तक सीमित रहने का अनुमान है।
मार्जिन पर दबाव और सेक्टर में मिला-जुला असर
Nomura की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में हल्की से मध्यम गिरावट देखने को मिल सकती है। इसका असर अलग-अलग बैंकों पर उनके लोन पोर्टफोलियो और देनदारियों को मैनेज करने की क्षमता पर निर्भर करेगा। जहाँ Federal Bank इस गिरावट से बच सकता है, वहीं Bank of Baroda और Axis Bank जैसे संस्थानों पर ज्यादा दबाव देखने को मिल सकता है। यह मुख्य रूप से डिपॉजिट की लागत बढ़ने और कुछ बैंकों द्वारा कम यील्ड वाले लोन सेगमेंट्स की ओर रणनीतिक बदलाव के कारण हो सकता है।
हालांकि, सरकारी बॉन्ड यील्ड में नरमी से बैंकों के ट्रेजरी पोर्टफोलियो को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, जो मार्जिन के दबाव को कुछ हद तक कम कर सकता है। इसका फायदा खासकर पब्लिक सेक्टर बैंकों को ज्यादा मिल सकता है, क्योंकि उनके पास आमतौर पर बड़े बॉन्ड पोर्टफोलियो होते हैं।
एसेट क्वालिटी और इकोनॉमिक रिस्क
सेक्टर की एसेट क्वालिटी फिलहाल स्थिर दिख रही है, जिसमें अनसिक्योर्ड रिटेल लोन और माइक्रोफाइनेंस जैसे सेगमेंट्स में तनाव कम होने के संकेत हैं। लेकिन, क्रेडिट ग्रोथ की तुलना में डिपॉजिट ग्रोथ के लगातार पीछे रहने से सेक्टर में फंडिंग की एक स्ट्रक्चरल चुनौती बनी हुई है, जिससे क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। Nomura का कहना है कि RBI के FCNR(B) डिपॉजिट्स को लेकर हालिया उपायों से सितंबर तिमाही से इस फंडिंग गैप को पाटने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, निवेशकों को मॉनसून के असर पर भी नजर रखनी चाहिए। मॉनसून में देरी या असमानता ग्रामीण इलाकों में लोन पोर्टफोलियो के साथ-साथ MSMEs और कमर्शियल व्हीकल्स जैसे सेगमेंट्स के लिए भी जोखिम पैदा कर सकती है, जिससे इस फाइनेंशियल ईयर के अंत में रीपेमेंट पर दबाव आ सकता है।
सेक्टर की पसंदीदा पिक्स
Nomura ने बैंकिंग स्पेस में HDFC Bank, ICICI Bank और Kotak Mahindra Bank को अपनी टॉप पसंद बताया है। खास बात यह है कि HDFC Bank को ब्रोकरेज की पसंदीदा लिस्ट में वापस शामिल किया गया है, जिसने Axis Bank की जगह ली है। नतीजों के सीजन के दौरान, निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये बैंक अपने फंड की लागत को कितनी प्रभावी ढंग से मैनेज करते हैं और क्या वे फंडिंग और ब्याज दरों के मौजूदा माहौल के बावजूद लोन ग्रोथ की गति बनाए रख पाते हैं।
