ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस Nomura का मानना है कि RBI ब्याज दरों में केवल **25-50 बेसिस पॉइंट्स** की ही बढ़ोतरी करेगा। यह बाजार के उस अनुमान के ठीक उलट है, जिसमें **125 बेसिस पॉइंट्स** की बड़ी बढ़ोतरी की बात की जा रही थी।
बाजार बनाम नोमुरा (Nomura) की राय
जहां पूरा फाइनेंशियल मार्केट यह मानकर चल रहा है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) आने वाले समय में ब्याज दरों में 125 बेसिस पॉइंट्स तक का इजाफा कर सकता है, वहीं Nomura की रिपोर्ट ने एक अलग नजरिया पेश किया है। ब्रोकरेज का मानना है कि दरें केवल 25 से 50 बेसिस पॉइंट्स ही बढ़ेंगी, जिससे कंपनियों और आम कर्जदारों पर पड़ने वाला बोझ उम्मीद से काफी कम रहेगा।
महंगाई का गणित
इस अनुमान के पीछे मुख्य वजह कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) का ठंडा होना है, जो पहले 5% के आसपास थी और अब घटकर करीब 3% पर आ गई है। Nomura का कहना है कि अर्थव्यवस्था में व्यापक रूप से महंगाई का दबाव नहीं है, इसलिए सेंट्रल बैंक को बहुत सख्त रुख अपनाने की जरूरत नहीं है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि दिसंबर 2026 तक ब्याज दरें 5.75% के आसपास स्थिर हो जाएंगी।
क्या हैं रिस्क फैक्टर्स?
रास्ता पूरी तरह साफ नहीं है। फूड इन्फ्लेशन अब भी सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है। Nomura ने अनुमान लगाया है कि फसल खराब होने या अन्य कारणों से साल 2026 की आखिरी तिमाही तक हेडलाइन इन्फ्लेशन 6.3% तक पहुंच सकती है। यदि ऐसा हुआ, तो RBI को उम्मीद के विपरीत दरें लंबे समय तक ऊंची रखनी पड़ सकती हैं।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
अगर ब्याज दरें कम बढ़ती हैं, तो इसका सीधा फायदा रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे उन सेक्टर्स को होगा जिन पर कर्ज का बोझ ज्यादा है। बैंक जरूर इस खबर को मिले-जुले अंदाज में देखेंगे, क्योंकि कम रेट हाइक का मतलब नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में सीमित बढ़ोतरी होना है। अब बाजार की नजरें RBI की अगली मीटिंग्स पर टिकी हैं कि वे महंगाई के डेटा पर कैसा रुख अपनाते हैं।
