उम्र सीमा के नियमों के चलते नोएल टाटा 12 नवंबर को टाटा ग्रुप की 6 कंपनियों के बोर्ड से इस्तीफा दे देंगे। हालांकि, इसी बीच टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को लेकर एक बड़ा गवर्नेंस विवाद भी सामने आया है।
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा 12 नवंबर को टाटा ग्रुप की प्रमुख कंपनियों—Trent, Voltas, Tata Steel, Titan, Tata International और Tata Investment Corporation के बोर्ड से रिटायर हो रहे हैं। ग्रुप की पॉलिसी के मुताबिक, 70 वर्ष की आयु पूरी होने पर नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स को रिटायर होना अनिवार्य है।\n\n### गवर्नेंस और विवाद का पेंच\n\nबोर्ड से हटने के बावजूद नोएल टाटा, टाटा संस के बोर्ड में नॉमिनी डायरेक्टर बने रहेंगे। लेकिन कंपनी के भीतर इस वक्त सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। विवाद की जड़ फरवरी 2027 से शुरू होने वाले अगले 5 साल के कार्यकाल के लिए एन चंद्रशेखरन की चेयरमैन पद पर पुनः नियुक्ति है।\n\nनोएल टाटा ने टाटा संस के बोर्ड की 17 सितंबर को हुई वोटिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 26 अक्टूबर को कंपनी सेक्रेटरी को लिखे पत्र में आपत्ति जताई है कि क्या इस नियुक्ति को टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नॉमिनेटेड डायरेक्टर्स का जरूरी बहुमत मिला था। उन्होंने वोटिंग रिकॉर्ड और मीटिंग की पूरी जानकारी की मांग की है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?\n\nटाटा ग्रुप इस वक्त सेमीकंडक्टर, एविएशन और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। टाटा संस में 66% हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स और ग्रुप के ऑपरेशनल लीडरशिप के बीच यह खींचतान निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। यह विवाद बताता है कि ग्रुप के फ्यूचर रोडमैप और गवर्नेंस को लेकर अंदरूनी स्तर पर अभी भी मतभेद बरकरार हैं।
