टाटा संस को 'अपर लेयर' NBFC के तौर पर लिस्टिंग से बचने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। ग्रुप के चेयरमैन नोएल टाटा जल्द ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ इस मामले पर सीधी बातचीत करेंगे। दरअसल, RBI के नियमों के तहत टाटा संस को सितंबर 2025 तक स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होना अनिवार्य है, लेकिन ग्रुप इसे एक कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर री-क्लासिफाई कराने की कोशिश कर रहा है।
RBI से क्या है टाटा संस का पंगा?
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा अगस्त 2026 तक RBI के साथ इस मुद्दे पर सीधे बातचीत करेंगे। दरअसल, RBI ने टाटा संस को 'अपर लेयर' नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) का दर्जा दिया हुआ है। ऐसे बड़े NBFCs को 3 साल के अंदर स्टॉक मार्केट में लिस्ट होना पड़ता है, और टाटा संस के लिए यह डेडलाइन सितंबर 2025 है। लिस्टिंग होने का मतलब होगा कि टाटा संस को अपने हिसाब-किताब और गवर्नेंस स्ट्रक्चर को पब्लिक शेयरहोल्डर्स के सामने खोलना पड़ेगा, जो ग्रुप के लिए एक बड़ा बदलाव होगा।
CIC बनने की कवायद
इस लिस्टिंग की मजबूरी से बचने के लिए, टाटा संस खुद को एक कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर री-क्लासिफाई कराने की कोशिश में जुटी है। CIC मुख्य रूप से एक होल्डिंग कंपनी होती है जो ग्रुप की दूसरी कंपनियों में निवेश करती है। इस री-क्लासिफिकेशन के लिए कंपनी ने RBI को कई अंडरटेकिंग्स दी हैं, जिसमें कहा गया है कि वह ग्रुप की कंपनियों को उधार देने के लिए नया कर्ज नहीं लेगी और न ही किसी फीस के बदले गारंटी देगी। साथ ही, कंपनी ने अपना एक्सटर्नल लोन भी चुका दिया है।
लीडरशिप बदलाव और SP ग्रुप पर असर
यह मामला ऐसे समय में आया है जब टाटा ग्रुप एक बड़े लीडरशिप बदलाव की तैयारी कर रहा है। मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल पूरा होने पर रिन्यूअल नहीं चाहेंगे। ऐसे में, होल्डिंग कंपनी की स्थिति को स्पष्ट करना ग्रुप के भविष्य की संरचना के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा, SP ग्रुप, जिसके पास टाटा संस में करीब 18% हिस्सेदारी है, पर भी इसका असर पड़ेगा। अगर टाटा संस लिस्ट होती है, तो SP ग्रुप के लिए अपनी हिस्सेदारी बेचने का रास्ता साफ हो जाएगा। लेकिन अगर यह अनलिस्टेड रहती है, तो SP ग्रुप के लिए अपनी हिस्सेदारी को लिक्विडेट करना और भी मुश्किल हो जाएगा।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों की नजर RBI के फैसले पर रहेगी कि क्या टाटा संस को CIC स्टेटस मिलेगा या वह 'अपर लेयर' NBFC बनी रहेगी। इस फैसले का टाटा ग्रुप की भविष्य की कैपिटल स्ट्रैटेजी और होल्डिंग स्ट्रक्चर पर सीधा असर पड़ेगा।
