Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने ग्रुप के निवेश फैसलों में अब कड़े वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline) की मांग की है। **₹23,000 करोड़** से ज्यादा के बड़े कैपिटल खर्चों के लिए अब डिटेल बिजनेस प्लान और रिस्क असेसमेंट अनिवार्य होगा।
Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी Tata Sons में गवर्नेंस के नए मानक तय करने की पहल की है। अब ग्रुप के मैनेजमेंट को ₹23,000 करोड़ से अधिक के हर बड़े कैपिटल निवेश के लिए बाकायदा बिजनेस केस पेश करना होगा, जिसमें मुनाफे की संभावनाओं और संभावित रिस्क का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य होगा। यह बदलाव 'समरी-बेस्ड अप्रूवल' से हटकर 'एविडेंस-बेस्ड' प्लानिंग की दिशा में एक बड़ा कदम है।
क्यों है यह बदलाव जरूरी?
हाल के दिनों में Tata Sons ने Air India, Tejas Networks और Tata Digital जैसे बिजनेस में भारी मात्रा में कैपिटल इंजेक्ट किया है। ग्रुप के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत, ₹100 करोड़ से ज्यादा के किसी भी निवेश के लिए ट्रस्ट के नामित डायरेक्टर्स का समर्थन जरूरी है। Noel Tata और Venu Srinivasan अब इन बड़े खर्चों पर बोर्ड मीटिंग्स में ज्यादा बारीकी से सवाल उठा रहे हैं।
RBI और लिस्टिंग का दबाव
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने Tata Sons को 'अपर लेयर' की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में क्लासिफाई किया है। इसके चलते कंपनी पर पब्लिक लिस्टिंग और सख्त अनुपालन (Compliance) का दबाव है। बोर्ड N. Chandrasekaran की फिर से नियुक्ति और इंटरनल रिस्ट्रक्चरिंग जैसे अहम मुद्दों पर भी विचार कर रहा है।
इन्वेस्टर्स के लिए यह एक बड़ा संकेत है कि टाटा ग्रुप अब अपने विस्तार के दौर में वित्तीय अनुशासन पर पूरा जोर दे रहा है, ताकि आने वाले समय में एविएशन और डिजिटल जैसे सेक्टरों में टर्नअराउंड को मजबूती से अंजाम दिया जा सके।
