Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने Tata Sons बोर्ड को Shapoorji Pallonji (SP) Group की **18%** हिस्सेदारी वापस खरीदने का प्लान सौंपा है। **₹25,000 करोड़** के इस बायबैक से सालों से चला आ रहा कानूनी विवाद सुलझ सकता है।
सालों पुराने विवाद का समाधान?
टाटा ग्रुप और Shapoorji Pallonji परिवार के बीच साल 2016 से चल रहे कानूनी और मालिकाना हक के तनाव को खत्म करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। SP Group, जो भारत के सबसे पुराने बिजनेस घरानों में से एक है, Tata Sons में एक माइनॉरिटी शेयरहोल्डर है। लंबे समय से चल रही खींचतान के बीच यह बायबैक डील दोनों पक्षों के लिए अहम हो सकती है।
डील का गणित और फंडिंग
नोएल टाटा के प्रस्ताव के अनुसार, यह बायबैक 18 महीने की अवधि में दो चरणों (tranches) में पूरा किया जा सकता है। वैल्यूएशन के लिए इनकम टैक्स की 'फेयर वैल्यू' पद्धति अपनाने का सुझाव दिया गया है ताकि कीमत को लेकर स्पष्टता बनी रहे। कंपनी इसके लिए इंटरनल कैश फ्लो का इस्तेमाल करने के साथ-साथ कुछ लिस्टेड टाटा ग्रुप कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने और नए रणनीतिक साझेदारों को लाने पर भी विचार कर रही है। हालांकि, इस प्रक्रिया के लिए NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) की मंजूरी जरूरी होगी।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
अभी यह प्रस्ताव केवल बोर्ड स्तर पर चर्चा का विषय है, कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से वैल्यूएशन रही है, क्योंकि SP Group पहले ऊंची कीमत की मांग करता रहा है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि दोनों पक्षों के बीच क्या अंतिम सहमति बनती है और अगर कंपनी फंड जुटाने के लिए अपनी लिस्टेड कंपनियों में हिस्सा बेचती है, तो इसका असर मार्केट पर क्या होगा।
