Tata Sons में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने N. Chandrasekaran को तीसरी बार चेयरमैन बनाने के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने बोर्ड मीटिंग की प्रक्रिया और वोटिंग अधिकारों पर सवाल उठाए हैं, जिससे ग्रुप के गवर्नेंस को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
टाटा ग्रुप के भीतर बोर्डरूम का तनाव अब खुलकर सामने आ गया है। मामला 17 सितंबर को हुई बोर्ड मीटिंग का है, जिसमें N. Chandrasekaran को अगले 5 साल के कार्यकाल के लिए फिर से चेयरमैन चुना गया था। इस फैसले के खिलाफ Noel Tata ने 30 सितंबर, 2026 को लिखित आपत्ति दर्ज कराई है।
विवाद की मुख्य वजह (Key Conflict)
बोर्ड मीटिंग में हुई वोटिंग 4-1 के अंतर से पास हुई थी, जिसमें Noel Tata अकेले असंतुष्ट थे। Noel का तर्क है कि एजेंडा अचानक लाया गया और बिना पर्याप्त चर्चा के इसे पास कराने के लिए कास्टिंग वोट का गलत इस्तेमाल हुआ। उन्होंने इसके कानूनी आधार की जांच के लिए पूर्व CJI D.Y. Chandrachud से सलाह ली है। इसके जवाब में Tata Sons ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस U.U. Lalit और B.N. Srikrishna की कानूनी राय पेश की है।
RBI और निवेशकों पर असर
यह विवाद ऐसे समय में हुआ है जब RBI ने Tata Sons को 'अपर लेयर' NBFC घोषित कर रखा है। कंपनी पर शेयर बाजार में लिस्ट होने या स्ट्रक्चर बदलने का भारी दबाव है। इस अंदरूनी कलह से Tata Chemicals और Tata Investment Corporation जैसे शेयरों में भी अस्थिरता देखी जा रही है।
मामला अब महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर तक पहुंच चुका है, जहां Noel Tata और उनके बेटे Neville ने कैविएट फाइल की है। निवेशकों के लिए कंपनी का अगला कदम और लिस्टिंग से जुड़ी प्रगति अब सबसे बड़ी वॉच-लिस्ट बन गई है।
