शानदार वित्तीय नतीजे
Nisus Finance Services Co Limited (NIFCO) का प्रदर्शन 9 महीने (9M FY26) के लिए बेहद मजबूत रहा है। कंपनी का कंबाइंड प्लेटफॉर्म रेवेन्यू ₹365.27 करोड़ रहा, जो पूरे FY25 को पीछे छोड़ चुका है। वहीं, प्री-कंसॉलिडेशन रेवेन्यू 9M FY26 में ₹114 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में काफी बड़ी बढ़त दिखाता है।
तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में, प्री-कंसॉलिडेशन एबिटडा (EBITDA) मार्जिन 73.9% और पैट (PAT) मार्जिन 53% रहा। खास बात यह है कि अब कंपनी का एसेट मैनेजमेंट सेगमेंट (Asset Management Segment) उसके कुल रेवेन्यू का 51% हिस्सा दे रहा है, जो इसकी बढ़ती अहमियत को दर्शाता है।
UAE में विस्तार और नई पहल
NIFCO ने UAE में एक बड़ी रणनीति के तहत ₹536 करोड़ ($60 मिलियन) का एसेट खरीदा है। यह डील दुबई मोटर सिटी में हुई है और कंपनी ने DIFC में काम करने के लिए पूरा DFSA लाइसेंस भी हासिल कर लिया है।
कंपनी अपने AUM (Assets Under Management) को भी बढ़ाने पर फोकस कर रही है। FY26 के अंत तक ₹3,000 से ₹4,000 करोड़ का AUM हासिल करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही, कंपनी Q1 FY27 तक UAE में टोकेनाइजेशन (Tokenization) सर्विस लॉन्च करने की योजना बना रही है। भारत में, NIFCO एक SM REIT (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) इकाई बनाने की प्रक्रिया में है और जल्द ही SEBI लाइसेंस के लिए आवेदन करेगी।
निर्माण कंपनी (NCCCL) का प्रदर्शन
NIFCO की कंस्ट्रक्शन सब्सिडियरी, NCCCL, ने Q3 FY26 में ₹152.5 करोड़ के नए प्रोजेक्ट हासिल किए हैं। कंपनी का मौजूदा ऑर्डर बुक ₹2,100 करोड़ से ज्यादा का है, जो भविष्य में ग्रोथ का संकेत देता है।
हालांकि, लेबर लॉ में बदलाव के कारण NCCCL को Q3 में ₹4 करोड़ का ग्रेच्युटी प्रोविजन (gratuity provision) के चलते एक बार के खर्च का सामना करना पड़ा, जिससे मुनाफे पर थोड़ा असर पड़ा। लेकिन, मैनेजमेंट अगले 12-18 महीनों में हाई-मार्जिन वाले प्रोजेक्ट्स पर फोकस करके NCCCL के मार्जिन में 3-4% सुधार लाने को लेकर आश्वस्त है।
जोखिम और भविष्य की राह
भारतीय रेगुलेशन (Regulations) को लेकर अनिश्चितता के चलते टोकेनाइजेशन सर्विसेज को UAE में प्राथमिकता दी जा रही है। कंपनी का बिजनेस मॉडल, खासकर इन्वेस्टमेंट साइड, रेवेन्यू में 'लम्पनेस' (lumpiness) या उतार-चढ़ाव दिखा सकता है, जो डील्स के टाइमिंग पर निर्भर करता है।
वहीं, मैनेजमेंट ने कंपनी के कंट्रोलिंग इंटरेस्ट (controlling interest) में 54% हिस्सेदारी बरकरार रखने की पुष्टि की है और कर्ज में भी कमी लाई गई है। कंपनी को उम्मीद है कि वह दिसंबर 2027 तक मेनबोर्ड लिस्टिंग (mainboard listing) के लिए योग्य हो जाएगी।