Nippon Life India Asset Management ने SEBI के साथ यस बैंक के AT-1 बॉन्ड से जुड़े पुराने विवाद को सुलझा लिया है। इसके लिए कंपनी ने **₹96.76 करोड़** का भुगतान किया है, जिसका असर सितंबर तिमाही के मुनाफे पर पड़ा है और इसमें **6%** की गिरावट देखी गई है।
विवाद का समाधान और सेटलमेंट
Nippon Life India Asset Management ने मार्केट रेगुलेटर SEBI से यस बैंक के AT-1 बॉन्ड्स से जुड़े नियामक जांच मामले में इन-प्रिंसिपल अप्रूवल पा लिया है। इस मामले को पूरी तरह खत्म करने के लिए कंपनी ने ₹96.76 करोड़ का भुगतान किया है। यह खर्च कंपनी की पुरानी विरासत (legacy issue) का हिस्सा था, जो उस समय का है जब यह Reliance Mutual Fund के नाम से जानी जाती थी।
क्यों शुरू हुई थी जांच?
यह जांच 2016 से 2019 के बीच किए गए निवेशों पर केंद्रित थी। रेगुलेटर ने सवाल उठाए थे कि क्या फंड हाउस ने यस बैंक के AT-1 बॉन्ड्स में निवेश अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों को लोन दिलाने में मदद करने के लिए किया था। 2020 में जब यस बैंक वित्तीय संकट में आया, तो ये बॉन्ड्स बेकार हो गए थे। अब अक्टूबर 2019 में कार्यभार संभालने वाली मौजूदा मैनेजमेंट इन पुराने मामलों को निपटाकर कंपनी की स्थिति को साफ करने पर जोर दे रही है।
नतीजों पर असर और बिजनेस का दम
इस सेटलमेंट का सीधा असर सितंबर तिमाही की बैलेंस शीट पर दिखा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹324 करोड़ रहा, जो पिछली अवधि के मुकाबले 6% कम है। हालांकि, मुख्य कारोबार की सेहत अब भी मजबूत है:
- औसत AUM (Assets Under Management): 20% बढ़कर ₹7.87 लाख करोड़ के पार पहुंच गया।
- ऑपरेटिंग प्रॉफिट: 25% उछलकर ₹523 करोड़ दर्ज किया गया।
रिकवरी का पैसा मिलेगा निवेशकों को
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इन बॉन्ड्स के राइट-ऑफ को पलटने का फैसला सुनाया है, जिससे रिकवरी की उम्मीद जगी है। Nippon Life AMC ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में बॉन्ड्स से कोई रिकवरी होती है, तो उसका पूरा पैसा सीधे उन प्रभावित निवेशकों को दिया जाएगा जिन्होंने इन स्कीमों में निवेश किया था। इसका कंपनी के भविष्य के प्रॉफिट पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
