Kotak AMC के Nilesh Shah ने Securities Transaction Tax (STT) और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को घटाने की मांग की है। उनका मानना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली भारत से एग्जिट नहीं, बल्कि ग्लोबल पोर्टफोलियो री-एलोकेशन है। सितंबर **2024** के हाई से बाजार में **30%** तक की गिरावट के बाद अब निवेशकों की नजरें बजट घोषणाओं पर टिकी हैं।
टैक्स का दोहरा बोझ और विदेशी निवेशक
Kotak Mahindra Asset Management Company के मैनेजिंग डायरेक्टर Nilesh Shah ने इक्विटी इन्वेस्टमेंट पर टैक्स ढांचे में बड़े बदलाव की वकालत की है। उनका तर्क है कि STT और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स का मिला-जुला असर विदेशी निवेशकों (FIIs) पर एक 'डबल टैक्स' बोझ की तरह है। चूंकि कई विदेशी निवेशक अपने घरेलू देशों में इन भारतीय टैक्स का क्रेडिट क्लेम नहीं कर पाते, इसलिए भारत में निवेश करना उनके लिए महंगा साबित होता है।
STT की कहानी
साल 2004 में जब Securities Transaction Tax लागू हुआ था, तब इसे कैपिटल गेन्स टैक्स के विकल्प के तौर पर लाया गया था। लेकिन समय के साथ दोनों टैक्स लागू रहने से निवेशकों पर वित्तीय बोझ बढ़ गया है। हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस समस्या को समझा है, लेकिन आने वाले केंद्रीय बजट में किसी ठोस बदलाव की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
बिकवाली की असली वजह
Nilesh Shah के अनुसार, विदेशी निवेशकों द्वारा हालिया बिकवाली का मतलब यह कतई नहीं है कि वे भारत छोड़ रहे हैं। यह सिर्फ फंड का रणनीतिक री-एलोकेशन है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में भारी निवेश के चलते उभरते बाजारों (Emerging Markets) से लिक्विडिटी कम हुई है।
बाजार का आउटलुक
सितंबर 2024 के पीक से लार्ज और मिड-कैप स्टॉक्स में लगभग 30% तक का करेक्शन देखा गया है। यह गिरावट वैल्युएशन को अब अधिक आकर्षक स्तर पर ले आई है। इसके बावजूद, कॉर्पोरेट अर्निंग्स के आंकड़े अभी भी मजबूत बने हुए हैं, जो बाजार को एक आधार प्रदान कर रहे हैं।
आने वाले समय में कंजम्पशन सेक्टर में तेजी की उम्मीद है, जिसे संभावित वेतन आयोग की सिफारिशों और खर्चों से बल मिलेगा। साथ ही, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ और लो NPA के चलते अवसर बने हुए हैं। निवेशक अब बजट की ओर देख रहे हैं कि क्या टैक्स स्ट्रक्चर में कोई राहत मिलती है या नहीं।
