नंदन नीलेकणी ने भारत के अकाउंट एग्रीगेटर (AA) नेटवर्क को विस्तार देने का रोडमैप तैयार किया है। इसके जरिए **2028** तक देश की आधी वयस्क आबादी को इस डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की तैयारी है, ताकि छोटे व्यवसायों के लिए लोन प्रक्रिया आसान हो सके।
बड़ा डिजिटल बदलाव
Infosys के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी ने एक महत्वाकांक्षी योजना का अनावरण किया है। वर्तमान में, अकाउंट एग्रीगेटर (AA) नेटवर्क देश की लगभग 20% आबादी तक ही सीमित है, जिसे 2028 तक 50% तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। यह नेटवर्क एक डिजिटल ब्रिज की तरह काम करता है, जो यूजर्स को अपनी फाइनेंशियल जानकारी सुरक्षित रूप से बैंकों और लेंडर्स के साथ शेयर करने की अनुमति देता है।
डेटा की नई धाराएं
अभी यह सिस्टम मुख्य रूप से बैंक ट्रांजैक्शन हिस्ट्री पर टिका है, लेकिन नीलेकणी की योजना में अब इनकम टैक्स रिटर्न, प्रोविडेंट फंड, FASTag और स्मॉल सेविंग्स अकाउंट के डेटा को भी शामिल किया जाएगा। यह 'रिच डेटा' सूक्ष्म उद्यमों (micro-enterprises) और गिग वर्कर्स के लिए वरदान साबित हो सकता है, जिनके पास पारंपरिक कोलैटरल की कमी होती है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
इन्वेस्टर नजरिए से, इस मॉडल की सफलता का असर बैंकिंग और NBFC सेक्टर पर सीधा पड़ेगा। सटीक डेटा मिलने से लेंडर्स बेहतर तरीके से क्रेडिट अंडरराइटिंग कर पाएंगे, जिससे NPA का रिस्क कम होने की उम्मीद है। हालांकि, जैसे-जैसे सिस्टम में संवेदनशील फिस्कल और यूटिलिटी डेटा जुड़ेगा, साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
इसके अलावा, इस मॉडल की आर्थिक स्थिरता भी महत्वपूर्ण है। नंदन नीलेकणी ने संकेत दिए हैं कि प्रतिभागियों को एक ऐसा फी-स्ट्रक्चर बनाना होगा जो डेटा प्रोवाइडर्स और टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए फायदेमंद हो। अगर छोटे बैंकों या फिनटेक कंपनियों के लिए लागत फायदे से ज्यादा हुई, तो एडॉप्शन की गति धीमी हो सकती है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि रेगुलेटरी दिशा-निर्देश और इंडस्ट्री का एडॉप्शन रेट इसे कैसे प्रभावित करते हैं।
