मार्केट में लौटी रौनक, पर क्यों बरतें सावधानी?
बजट के बाद आई गिरावट से उबरते हुए, निफ्टी ने 26,000 के अहम लेवल को पार कर लिया है। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की कैश और डेरिवेटिव्स मार्केट्स में जोरदार वापसी और टैरिफ को लेकर मिली सकारात्मक खबरों ने इस तेजी को बल दिया है।
फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर का दम
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा हाथ फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर का रहा। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स अपनी मीडियम-टर्म अपट्रेंड को बनाए हुए है और इसका P/E रेश्यो लगभग 18.0 है, जो निफ्टी 50 के P/E 22.3 से कहीं ज्यादा आकर्षक है। डेरिवेटिव्स पोजिशनिंग भी बुलिश दिख रही है, जिसमें फ्राइडे को अच्छी खासी लॉन्ग पोजीशंस बनीं या शॉर्ट कवरिंग हुई। कोटक महिंद्रा बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े बैंक ऊपर गए, हालांकि HDFC बैंक में 6 फरवरी को हल्की गिरावट दिखी। निफ्टी बैंक का RSI भी 57.878 पर 'बाय' सिग्नल दे रहा है।
IT और रियलिटी में दिख रही कमजोरी
लेकिन, दूसरी तरफ कुछ सेक्टर ऐसे हैं जहां कमजोरी साफ दिख रही है। IT सेक्टर लगातार संघर्ष कर रहा है, इसके सभी स्टॉक्स अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहे हैं। सेक्टर का P/E रेश्यो 25.3 है और एक साल का CAGR -16.9% है, जो बड़ी चुनौतियों का संकेत देता है। इसका RSI 31.6 के बियरिश लेवल पर है और MACD भी नेगेटिव है। 6 फरवरी को निफ्टी IT इंडेक्स 1.47% तक गिर गया था।
रियलिटी सेक्टर में कुछ रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं, जहां RSI लगभग 48.7 के आसपास है। DLF, लोढ़ा डेवलपर्स, गोOdrej प्रॉपर्टीज और ओबेरॉय रियल्टी जैसे स्टॉक्स में पोटेंशियल रिवर्सल पैटर्न बने हैं। हालांकि, 6 फरवरी को निफ्टी रियलिटी इंडेक्स 0.67% से 2% तक नीचे गया था। RSI 64 के करीब होने के बावजूद, यह एक कंफर्म्ड रिवर्सल नहीं, बल्कि टेक्निकल पुलबैक लग रहा है।
सस्टेनेबिलिटी पर सवाल और वैल्यूएशन की चिंता
मार्केट की यह मौजूदा तेजी पिछले बजट के बाद की रैलियों की याद दिलाती है, लेकिन इसकी सस्टेनेबिलिटी पर सवाल उठ रहे हैं। फरवरी 2025 एक मुश्किल महीना रहा था, जब निफ्टी में 6% की गिरावट आई थी और FIIs ने बिकवाली की थी। इसके मुकाबले, फरवरी 2024 में निफ्टी 1.18% बढ़ा था और रियलिटी टॉप परफॉर्मर था। निफ्टी 50 के लिए टेक्निकल इंडिकेटर्स मिले-जुले हैं; RSI लगभग 52.7 पर है और MACD बियरिश है। निफ्टी का 50-दिन का SMA लगभग 25,803.6 और 200-दिन का SMA लगभग 25,254.1 है, जो संकेत देता है कि मार्केट एक ऐसे जोन में है जहां सावधानी बरतनी चाहिए।
मार्केट का वैल्यूएशन (Valuation) भी बढ़ा हुआ दिख रहा है। निफ्टी का P/E 22.3 और भारत का ओवरऑल P/E रेश्यो फरवरी 2026 में 23.150 के आसपास है, जो ऐतिहासिक लोज़ की तुलना में ऊंचा है और 2021 की शुरुआत के ऑल-टाइम हाई के करीब है। IT सेक्टर का हाई P/E 25.3 और नेगेटिव CAGR, रियल्टी सेक्टर की रिकवरी पर संदेह और व्यापक मार्केट पार्टिसिपेशन की कमी, ये सब सवाल खड़े करते हैं कि क्या यह रैली टिकाऊ है।
आगे क्या? 🤔
कुल मिलाकर, बजट के बाद FIIs के निवेश और कुछ सेक्टरों की मजबूती से निफ्टी तो ऊपर गया है, लेकिन मार्केट में अंदरूनी विरोधाभास दिख रहे हैं। फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर की मजबूती, IT और रियल्टी सेक्टर की कमजोरी, मिले-जुले टेक्निकल इंडिकेटर्स और बढ़े हुए वैल्यूएशन को देखते हुए, निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। आगे का रास्ता सेलेक्टिव अपॉर्च्युनिटीज़ वाला लग रहा है, जहां खास स्टॉक्स पर नजर रखनी होगी।