सरकारी बैंकों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। Nifty PSU Bank इंडेक्स में शामिल 12 में से 8 दिग्गज बैंक अब अपने 200-डे मूविंग एवरेज के नीचे फिसल गए हैं। साल 2026 के अपने टॉप से ये शेयर **10%** से **30%** तक टूट चुके हैं, जिसका मुख्य कारण बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और सरकारी विनिवेश की अनिश्चितता है।
सरकारी बैंकों के लिए फिलहाल तकनीकी मोर्चे पर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। बाजार के जानकारों के लिए 200-डे मूविंग एवरेज (200-DMA) एक अहम पैमाना होता है, जो लंबे समय के ट्रेंड को दर्शाता है। जब कोई स्टॉक या इंडेक्स इसके नीचे जाता है, तो यह संकेत होता है कि तेजी का दौर कमजोर पड़ रहा है। वर्तमान में Nifty PSU Bank इंडेक्स के 12 में से 8 शेयर इसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।
बॉन्ड यील्ड का बैंक मुनाफे पर असर
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह है बॉन्ड यील्ड का बढ़ना। बैंक भारी मात्रा में सरकारी बॉन्ड में निवेश करते हैं। जब यील्ड बढ़ती है, तो बॉन्ड की कीमतें गिर जाती हैं, जिससे बैंकों के 'ट्रेजरी गेन्स' (Treasury Gains) पर सीधा असर पड़ता है। चूंकि ट्रेजरी गेन्स मुनाफे का एक अहम हिस्सा होते हैं, इसलिए बढ़ता ब्याज बैंक के प्रॉफिट मार्जिन को दबा रहा है। इसके साथ ही कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें और महंगाई की चिंता ने भी इंस्टीट्यूशनल निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
स्ट्रक्चरल अनिश्चितता और बाजार का मूड
टेक्निकल दबाव के अलावा, सरकारी बैंकों पर नीतिगत अनिश्चितता का साया भी है। बाजार में लगातार इस बात की चर्चा है कि सरकार विनिवेश (Divestment) या 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) ला सकती है, जिससे इक्विटी डाइल्यूशन का डर बना रहता है। हालांकि बैंकों ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी बैलेंस शीट काफी हद तक साफ की है, लेकिन बाजार की संवेदनशीलता किसी भी बड़े बदलाव की खबर पर तुरंत प्रतिक्रिया दे रही है।
फिलहाल, मोमेंटम इंडिकेटर्स सुस्त हैं और जल्द किसी बड़ी रिकवरी के संकेत नहीं दिख रहे हैं। निवेशकों के लिए आने वाले कुछ महीने बेहद महत्वपूर्ण हैं। बाजार की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या बॉन्ड यील्ड में स्थिरता आती है और सरकार की तरफ से भविष्य के विनिवेश प्लान पर क्या स्पष्टता मिलती है। साथ ही, आगामी तिमाही नतीजे यह तय करेंगे कि क्या बैंक बाहरी दबावों के बीच अपना परफॉरमेंस बनाए रख पाएंगे।
