9 सितंबर 2026 को Nifty IT इंडेक्स में लगभग **4%** की बड़ी गिरावट देखी गई। इसकी मुख्य वजह US फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर चिंता और Coforge के चेयरमैन का अचानक इस्तीफा है।
बाजार का हाल
बुधवार को Nifty IT इंडेक्स भारी बिकवाली के बीच 28,779.80 के निचले स्तर तक फिसल गया। कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के चलते सेक्टर के ज्यादातर प्रमुख शेयरों में लाल निशान के साथ कारोबार बंद हुआ।
Coforge में लीडरशिप का संकट
सबसे ज्यादा असर Coforge के शेयरों पर दिखा, जो 8% से 9% तक गिर गए। कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और चेयरमैन OP Bhatt ने अचानक इस्तीफा दे दिया है। कंपनी के मुताबिक, बोर्ड इवैल्यूएशन एक्सरसाइज के इंटरनल ऑडिट के दौरान कुछ चिंताएं सामने आई थीं। कंपनी ने अब Vivek Sharma को अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया है, जो 31 जनवरी 2027 तक इस पद पर रहेंगे। इस बदलाव ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता पैदा कर दी है।
ग्लोबल चुनौतियां और AI का पेच
आईटी सेक्टर के लिए मुश्किलें केवल कंपनी-विशिष्ट नहीं हैं। मार्केट डेटा के अनुसार, 16 सितंबर 2026 को होने वाली US फेडरल रिजर्व की मीटिंग में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 58% है। निवेशकों को डर है कि ऊंची ब्याज दरों से नॉर्थ अमेरिकन क्लाइंट्स अपने आईटी बजट में कटौती कर सकते हैं।
इसके अलावा, AI निवेश को लेकर भी एक स्ट्रक्चरल चुनौती बनी हुई है। फिलहाल दुनिया भर की टेक कंपनियां हार्डवेयर जैसे GPUs और डेटा सेंटर्स पर भारी खर्च कर रही हैं, लेकिन इसका फायदा भारतीय IT कंपनियों की सर्विस लेयर तक पहुँचने में अभी वक्त लग रहा है। यही वजह है कि मार्जिन को लेकर उम्मीदें दबी हुई हैं।
अब आगे क्या?
निवेशकों की नजरें US फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी हैं, जिससे क्लाइंट्स के आईटी बजट का भविष्य साफ होगा। वहीं, Coforge के शेयरधारकों को इंटरनल ऑडिट के नतीजों और परमानेंट लीडरशिप के रोडमैप का बेसब्री से इंतजार है।
