7 सितंबर, 2026 को भारतीय आईटी शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। Nifty IT इंडेक्स **1.27%** गिरकर **30,306.15** पर बंद हुआ। यह गिरावट मजबूत अमेरिकी जॉब रिपोर्ट के बाद आई है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका और गहरी हो गई है।
भारतीय टेक्नोलॉजी शेयरों पर 7 सितंबर, 2026 को जबरदस्त दबाव दिखा। बाजार की धारणा उस समय बिगड़ गई जब अमेरिका के मजबूत पेरोल डेटा ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना को बढ़ा दिया। इस बदलाव के चलते निवेशकों ने आईटी सेक्टर से अपना एक्सपोजर कम करना शुरू कर दिया है, क्योंकि बढ़ती ब्याज दरें ग्रोथ-ओरिएंटेड सेक्टर के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होती हैं।
अमेरिकी ब्याज दरों का आईटी पर असर क्यों?
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो कंपनियां जो भविष्य में कमाई करने वाली होती हैं, उनकी वैल्यूएशन कम हो जाती है। इसके अलावा, भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अमेरिका सबसे बड़ा मार्केट है। ऐसे में आशंका यह है कि अगर वहां की कंपनियां अपने खर्चों को मैनेज करने के लिए 'डिस्क्रीशनरी' (Discretionary) स्पेंडिंग घटाती हैं, तो डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स पर बुरा असर पड़ सकता है।
लार्ज-कैप शेयरों में बड़ी सुस्ती
आईटी सेक्टर के दिग्गज शेयरों में गिरावट साफ देखी गई। Infosys का शेयर 2.2% लुढ़क गया, जबकि Tech Mahindra में 1.57% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा Tata Consultancy Services (TCS), Wipro और HCL Technologies के शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। यह कमजोरी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि Mphasis और Persistent Systems जैसे मिड-कैप शेयरों ने भी दबाव महसूस किया।
आगे क्या उम्मीद करें?
फिलहाल फाइनेंशियल मार्केट यह मानकर चल रहे हैं कि सितंबर के मध्य में फेडरल रिजर्व द्वारा रेट हाइक की संभावना 58% है, जो अक्टूबर के लिए बढ़कर 70% हो जाती है। अब निवेशकों की नजरें अमेरिका के आगामी महंगाई आंकड़ों पर टिकी हैं। फिलहाल, शेयरधारकों के लिए सबसे जरूरी है कंपनियों का मैनेजमेंट कमेंट्री, जहां से यह साफ होगा कि क्लाइंट्स का बजट खर्च किस दिशा में जा रहा है।
