सितंबर 2024 के पीक (Peak) से Nifty 50 में **14.5%** की गिरावट आई है। बाजार की इस उठापटक के बीच फंड मैनेजर्स अब मिड और स्मॉल-कैप से निकलकर लार्ज-कैप और ब्लू-चिप कंपनियों का रुख कर रहे हैं।
वैल्यूएशन में सुधार का फायदा
पिछले दो वर्षों में मार्केट काफी महंगा हो गया था, लेकिन मौजूदा गिरावट ने इसे राहत दी है। Nifty 50 अब अपने एक साल के फॉरवर्ड अर्निंग्स के 17 के मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके 10 साल के औसत 18.9 के काफी करीब है। जून तिमाही में बड़ी कंपनियों ने 17.6% की शानदार सालाना अर्निंग्स ग्रोथ दिखाई है, जिसे देखते हुए एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि मार्केट ने मैक्रो-चिंताओं पर शायद 'ओवर-रिएक्ट' किया है।
इन्वेस्टर्स अब बैंकिंग और IT सेक्टर की दिग्गज कंपनियों को 3-4 साल के नजरिए से पोर्टफोलियो में जगह दे रहे हैं, ताकि अस्थिरता से बचाव हो सके।
अभी भी हैं चुनौतियां
वैल्यूएशन भले ही ठीक लग रही हो, लेकिन ग्लोबल फ्रंट पर रिस्क बरकरार है। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमत बढ़कर $102 प्रति बैरल पर पहुंच गई है, जो 2026 की शुरुआत से 68% ज्यादा है। इससे न केवल इंपोर्ट बिल बढ़ा है, बल्कि रुपये पर भी दबाव है।
इसके अलावा, फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) की लगातार बिकवाली भी इंडेक्स के लिए सिरदर्द बनी हुई है। ग्लोबल लेवल पर बढ़ते इंटरेस्ट रेट्स के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
निवेशकों के लिए सलाह
आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने के लिए 3 प्रमुख चीजों पर नजर रखें: कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता, FPI का रुख और कंपनियों के अगली तिमाही के नतीजे।
