Nifty Bank ने रचा इतिहास! 61,000 के पार, PSU स्टॉक्स में तूफानी उछाल

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Nifty Bank ने रचा इतिहास! 61,000 के पार, PSU स्टॉक्स में तूफानी उछाल
Overview

Nifty Bank का इंडेक्स आज **61,000** के अहम लेवल को पार कर गया है। पब्लिक सेक्टर के बैंकों (PSU Banks) में आई जबरदस्त तेजी ने इस उछाल को लीड किया, लेकिन वहीं कई बड़े प्राइवेट बैंकों में हल्की गिरावट देखी गई, जो बाजार में एक मिली-जुली तस्वीर पेश कर रहा है।

पब्लिक सेक्टर बैंकों की धाकड़ चाल

17 फरवरी 2026 को Nifty Bank इंडेक्स ने 61,000 का आंकड़ा पार कर लिया, जो हालिया तेजी का ही नतीजा है। इस ऐतिहासिक लेवल तक पहुंचने में पब्लिक सेक्टर के बैंकों (PSU Banks) की अहम भूमिका रही। बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) और पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank) के शेयर करीब 4% चढ़े, जो क्रमशः ₹303.25 और ₹124.97 के स्तर पर पहुंच गए। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) में 3% से अधिक और केनरा बैंक (Canara Bank) में 2% से ज्यादा की बढ़त देखी गई। इसके विपरीत, HDFC बैंक, ICICI बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे कई बड़े प्राइवेट बैंकों के शेयरों में मामूली गिरावट आई। IndusInd बैंक और SBI लगभग 1% चढ़ने में कामयाब रहे, जबकि Yes Bank में भी हल्की तेजी दिखी। AU स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) एकमात्र ऐसा बैंक रहा जिसमें 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

सेक्टर एनालिसिस: PSU की मजबूती बनाम प्राइवेट बैंकों की नरमी

बाजार की नजर अब पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर के बैंकों के प्रदर्शन पर टिकी है। आमतौर पर प्राइवेट बैंकों की तुलना में कम P/E रेश्यो पर ट्रेड करने वाले PSU बैंक, जैसे BoB और PNB, निवेशकों को काफी आकर्षित कर रहे हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, बैंक ऑफ बड़ौदा का P/E रेश्यो लगभग 10.5x और PNB का 9.8x के आसपास है, जो ICICI बैंक (लगभग 17.2x) या HDFC बैंक (लगभग 22.5x) से काफी कम है। इससे लगता है कि निवेशक वैल्यू स्टॉक्स की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें PSU बैंक अपने अर्निंग पोटेंशियल या डिविडेंड यील्ड के मुकाबले सस्ते लग रहे हैं, जबकि प्राइवेट बैंक या तो दबाव में हैं या महंगे माने जा रहे हैं। प्राइवेट बैंकों के फीके प्रदर्शन से यह भी संकेत मिलता है कि इंडेक्स में भले ही बड़ी तेजी दिखी हो, लेकिन पूरे बैंकिंग सेक्टर में अभी व्यापक विश्वास की कमी है।

टेक्निकल लेवल्स और बाजार की उम्मीदें

टेक्निकल एनालिस्ट्स के अनुसार, इंडेक्स का चार्ट बुलिश (तेजी का) दिख रहा है, जिसमें एक मजबूत बुलिश कैंडल पिछले मंदी के सेंटीमेंट को पलटने का संकेत दे रही है। डेली RSI (Relative Strength Index) में भी बुलिश क्रॉसओवर देखा गया है, जो आगे की तेजी की संभावना को मजबूत करता है। LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रुपक डे का मानना है कि इंडेक्स 61,400 तक जा सकता है, और पिछला रेजिस्टेंस लेवल 60,500 अब सपोर्ट का काम करेगा। बजाज ब्रोकिंग (Bajaj Broking) आने वाले समय में 60,000 से 61,500 के दायरे में कंसॉलिडेशन (दायरे में कारोबार) की उम्मीद कर रहा है। तत्काल रेजिस्टेंस 61,500 पर है, जबकि ऑल-टाइम हाई 61,750 के करीब दूसरा टारगेट हो सकता है। नियर-टर्म सपोर्ट 60,400 और उसके बाद 60,200 पर देखा जा रहा है। वहीं, चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग (Choice Equity Broking) के आकाश शाह के अनुसार, 61,150–61,250 के स्तर पर रेजिस्टेंस है, जबकि 60,650–60,750 पर महत्वपूर्ण शॉर्ट-टर्म सपोर्ट बना हुआ है।

विश्लेषकों की चिंताएं (Bear Case)

PSU बैंकों में मजबूती और कई प्राइवेट बैंकों के कमजोर प्रदर्शन के बीच कुछ स्ट्रक्चरल चिंताएं भी उठ रही हैं। अगर बड़े प्राइवेट बैंक रफ्तार पकड़ने में संघर्ष कर रहे हैं, तो यह क्रेडिट डिमांड या एसेट क्वालिटी पर व्यापक आर्थिक दबाव का संकेत हो सकता है, जिन क्षेत्रों में प्राइवेट बैंक आमतौर पर अधिक मजबूत माने जाते हैं। कुछ पब्लिक सेक्टर बैंकों पर भारी कर्ज का बोझ और नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) साइकिल्स के प्रति उनकी ऐतिहासिक संवेदनशीलता एक अंतर्निहित जोखिम बनी हुई है, जो आर्थिक मंदी से और बढ़ सकती है। भले ही मौजूदा तेजी वैल्यू इन्वेस्टर्स को PSU की ओर आकर्षित कर रही हो, लेकिन पूरे बैंकिंग सेक्टर में टिकाऊ रिकवरी के लिए व्यापक भागीदारी और प्राइवेट बैंकिंग सेगमेंट में नए सिरे से विश्वास की आवश्यकता होगी। इसके बिना, इंडेक्स की यह चढ़ाई प्रॉफिट-टेकिंग (मुनाफावसूली) के प्रति संवेदनशील बनी रहेगी। कुछ PSU संस्थानों के मैनेजमेंट ट्रैक रिकॉर्ड पर भी अतीत में उनकी कुशलता और गवर्नेंस को लेकर सवाल उठते रहे हैं, जो उनके अधिक चुस्त प्राइवेट साथियों की तुलना में उनकी लंबी अवधि की ग्रोथ को सीमित कर सकते हैं।

आगे क्या?

भविष्य की चाल का अनुमान लगाते हुए, एनालिस्ट्स उम्मीद कर रहे हैं कि Nifty Bank इंडेक्स 60,000 से 61,500 के दायरे में कंसॉलिडेशन फेज से गुजरेगा। 60,400 का इमीडिएट सपोर्ट और 61,500 का रेजिस्टेंस महत्वपूर्ण लेवल होंगे। भले ही टेक्निकल इंडिकेटर्स मजबूती दिखा रहे हों, लेकिन PSU और प्राइवेट बैंकों के प्रदर्शन में यह अंतर एक अनिश्चित आउटलुक पैदा करता है। निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि क्या प्राइवेट बैंकों की मजबूत लीडरशिप के बिना बैंकिंग सेक्टर लाभ कमा पाता है, या यह सिर्फ सरकारी बैंकों में एक अस्थायी वैल्यू प्ले है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.