नतीजों में भारी गिरावट के बीच राइट्स इश्यू का ऐलान
Nexome Capital Markets लिमिटेड ने एक ड्राफ्ट लेटर ऑफ ऑफर जारी कर ₹2500 लाख यानी ₹25 करोड़ का राइट्स इश्यू लाने का ऐलान किया है। इस पूंजी का इस्तेमाल शेयर और सिक्योरिटीज, म्यूचुअल फंड्स में निवेश के साथ-साथ सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। हालांकि, यह कदम कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY2025) के बेहद खराब नतीजों के बीच आया है।
FY2025 के आंकड़े क्या बताते हैं?
कंपनी के FY2025 के ऑडिटेड नतीजों के अनुसार, ऑपरेशन से होने वाली कुल आय में 81.5% की भारी गिरावट देखी गई है। आय घटकर ₹4444.02 लाख रह गई, जबकि पिछले साल FY2024 में यह ₹23986.46 लाख थी। इस भारी राजस्व गिरावट का सीधा असर कंपनी के मुनाफे पर पड़ा है। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 51.6% की कमी आई है, जो ₹240.91 लाख से घटकर ₹116.65 लाख रह गया है।
इसी के चलते, बेसिक अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹4.31 से घटकर ₹2.04 पर आ गया है। रिटर्न ऑन नेट वर्थ (RONW) भी घटकर सिर्फ 1.07% रह गया, जो पिछले साल 2.36% था।
कर्ज़ में हुआ बेतहाशा इज़ाफ़ा
चिंता की बात यह है कि कंपनी का कुल उधार (Total Borrowings) FY2024 के ₹9.31 लाख से बढ़कर FY2025 में ₹300.20 लाख हो गया है। यह 3132% से भी ज़्यादा की बढ़ोतरी है। कम हो रहे मुनाफे के बावजूद कर्ज़ में हुई यह भारी बढ़ोतरी कंपनी की वित्तीय स्थिति और देनदारियों को पूरा करने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
निवेशकों के लिए सवाल?
राइट्स इश्यू से कंपनी की पूंजी तो बढ़ेगी, लेकिन निवेशकों के लिए शेयरहोल्डिंग डाइल्यूट (Shareholding Dilution) होने का खतरा है। ₹25 करोड़ के इस्तेमाल पर निवेशक बारीकी से नज़र रखेंगे और उनसे इस बात का भरोसा चाहेंगे कि यह पैसा कंपनी के प्रदर्शन को कैसे सुधारेगा और बढ़ते कर्ज़ के प्रभाव को कैसे कम करेगा। वित्तीय आंकड़ों में इतनी बड़ी गिरावट कंपनी की अंदरूनी बिज़नेस चुनौतियों और मैनेजमेंट की रणनीति पर सवाल उठाती है।
SEBI की पुरानी सख्ती
Nexome Capital Markets लिमिटेड का रेगुलेटरी इतिहास भी थोड़ा विवादित रहा है। कंपनी को पहले भी SEBI से पेनल्टी मिली थी, हालांकि कुछ मामलों में सिक्योरिटीज एप्लेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने राहत दी थी। SEBI ने पहले इसके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के रिन्यूअल को भी रिजेक्ट किया था, जिसे SAT ने कंपनी द्वारा अपने एसोसिएट में हिस्सेदारी बेचने के बाद पलट दिया था। ये पुराने मामले संभावित निवेशकों के लिए गवर्नेंस रिस्क (Governance Risk) बढ़ाते हैं।