वेल्थ मैनेजमेंट फर्म Nexedge Capital ने अपनी पहली बड़ी फंडिंग राउंड में **$20 मिलियन** की राशि जुटाई है। Mirae Asset Venture Investment और Elev8 Venture Partners के नेतृत्व वाले इस राउंड में कंपनी का वैल्युएशन लगभग **$250 मिलियन** तक पहुँच गया है। यह उपलब्धि फर्म के लॉन्च के महज़ 18 महीने बाद हासिल हुई है। इस फंड का इस्तेमाल टियर-2 और टियर-3 शहरों में विस्तार करने और लेंडिंग व एनआरआई (NRI) केंद्रित नई सेवाओं को शुरू करने में किया जाएगा।
वेल्थ मैनेजमेंट में Nexedge Capital की बड़ी डील
प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट फर्म Nexedge Capital ने $20 मिलियन का फंडिंग राउंड सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। Mirae Asset Venture Investment और Elev8 Venture Partners की अगुवाई वाले इस पहले इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट में कंपनी का वैल्यूएशन करीब $250 मिलियन आंका गया है। यह फर्म एक मल्टी-फैमिली ऑफिस के तौर पर काम करती है और अमीर परिवारों के वित्तीय मामलों को संभालती है।
18 महीनों में कैसे बदली Nexedge की तस्वीर?
फरवरी 2025 में 360 ONE के पूर्व एग्जीक्यूटिव Anirudha Taparia द्वारा स्थापित Nexedge Capital, सिर्फ़ इन्वेस्टेबल एसेट्स के बजाय कुल नेट वर्थ के मैनेजमेंट पर फोकस करती है। फर्म का दावा है कि अपनी स्थापना के 18 महीनों में, उन्होंने 1,300 से ज़्यादा क्लाइंट फैमिलीज के $3 बिलियन से ज़्यादा के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट का पोर्टफोलियो तैयार किया है। चूंकि Nexedge Capital एक प्राइवेट कंपनी है, इसके शेयर NSE या BSE जैसे पब्लिक एक्सचेंजों पर ट्रेड नहीं होते हैं।
विस्तार की नई राहें और बिजनेस लाइन्स
कंपनी इस नए फंड का इस्तेमाल भारत भर में अपने ऑपरेशंस को बढ़ाने के लिए करेगी। मौजूदा योजनाओं में टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपनी फिजिकल मौजूदगी का विस्तार करना और सीनियर बैंकरों की टीम को बढ़ाना शामिल है। अपनी मुख्य एडवाइजरी सेवाओं से आगे बढ़कर, फर्म नए बिजनेस सेगमेंट्स में उतरने की तैयारी में है। इसमें एक नॉन-बैंक लेंडिंग (NBFC) वर्टिकल, नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) के लिए एक समर्पित सेवा और नॉन-डिस्क्रिशनरी पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (NDPMS) शामिल हैं।
फर्म अपने अनोखे ओनरशिप स्ट्रक्चर का भी दावा करती है, जिसमें 150 से ज़्यादा सीनियर लीडर्स ने कंपनी में अपना खुद का कैपिटल इन्वेस्ट किया है। इस मॉडल का मकसद एडवाइजर्स के लॉन्ग-टर्म इंटरेस्ट को उनके क्लाइंट्स के साथ अलाइन करना है।
रिस्क और मार्केट की चुनौतियाँ
जहां एक ओर फर्म तेजी से बढ़ रही है, वहीं इसे एक बेहद कॉम्पिटिटिव माहौल का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर में पहले से ही स्थापित बैंक, बड़े फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और कई अन्य छोटी फर्म्स मौजूद हैं, जो सभी एक ही क्लाइंट बेस के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इससे प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ता है और टैलेंट को आकर्षित करना व बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
इसके अलावा, कंपनी को नए क्षेत्रों जैसे लेंडिंग में विविधता लाने में एग्जीक्यूशन रिस्क का भी सामना करना पड़ेगा। NBFC (नॉन-बैंक लेंडिंग) बिजनेस में कदम रखने के लिए प्योर वेल्थ एडवाइजरी की तुलना में अलग स्किल्स की ज़रूरत होती है, जिसमें क्रेडिट रिस्क का मैनेजमेंट भी शामिल है। एक फाइनेंशियल सर्विसेज प्रोवाइडर के तौर पर, Nexedge को सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) और अन्य वित्तीय अथॉरिटीज द्वारा बनाए गए नियमों का भी सख्ती से पालन करना होगा।
आगे क्या देखना होगा?
कंपनी की प्रगति पर नज़र रखने वालों के लिए, मुख्य बात यह होगी कि मैनेजमेंट टीम नए शहरों में अपने विस्तार को कितनी प्रभावी ढंग से लागू करती है और क्या नए बिजनेस लाइन्स, खासकर लेंडिंग वर्टिकल, स्थिर रिटर्न जेनरेट कर पाते हैं। निवेशक और इंडस्ट्री ऑब्जर्वर्स यह भी देखेंगे कि कंपनी अपनी तेज ग्रोथ और प्रतिस्पर्धी बाजार में सर्विस क्वालिटी बनाए रखने की ज़रूरत के बीच कैसे संतुलन बनाती है।
