दिवाली के बाद UPI से पेमेंट करना अब पूरी तरह फ्री नहीं रहेगा। सरकार ने नॉन-एसेंशियल गुड्स पर ₹2,000 से ऊपर के ट्रांजेक्शन पर **0.4%** मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का फैसला किया है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) अब UPI ट्रांजेक्शन के लिए एक नया स्ट्रक्चर लेकर आ रहा है। दिवाली के बाद से नॉन-एसेंशियल आइटम्स की खरीदारी पर ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर 0.4% MDR देना होगा। यह एक तरह का प्रोसेसिंग चार्ज है जो मर्चेंट को देना पड़ता है।
आम आदमी पर कितना असर?
सरकार का दावा है कि 96% मर्चेंट ट्रांजेक्शन इससे प्रभावित नहीं होंगे। आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों जैसे यूटिलिटी बिल, फ्यूल और इंश्योरेंस को इस दायरे से बाहर रखा गया है। इन सेवाओं पर केवल ₹5 का फ्लैट चार्ज लगेगा, जिससे रिटेल कंज्यूमर को राहत मिलेगी।
किन सेक्टरों की बढ़ेगी मुश्किलें?
नियमों में बदलाव का सबसे बड़ा असर एजुकेशन और कंज्यूमर लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स पर पड़ेगा, क्योंकि इन्हें 'एसेंशियल' लिस्ट में नहीं रखा गया है। साल 2025 की पहली छमाही में ही इन प्लेटफॉर्म्स ने ₹14.8 लाख करोड़ का ट्रांजेक्शन प्रोसेस किया है। बिना किसी कैप के, इन सेक्टरों को 0.4% लेवी का पूरा बोझ झेलना पड़ सकता है। अब कंपनियों के सामने चुनौती होगी कि वे इस लागत को खुद सहें या ग्राहकों पर डालें।
दूसरी ओर, ब्रोकरेज इंडस्ट्री ने अपने लिए 0.02% की निचली दर तय करवा ली है, जो अलग-अलग सेक्टरों के लिए सरकार के अलग दृष्टिकोण को दर्शाता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन्स के वॉल्यूम पर इसका क्या असर पड़ता है।
