ब्रिक्स (BRICS) देशों द्वारा स्थापित New Development Bank (NDB) अपने **$30 बिलियन** के लेंडिंग टारगेट को हासिल करने की कोशिश में है। मजबूत AA रेटिंग होने के बावजूद, यह संस्थान वर्ल्ड बैंक जैसे दिग्गजों की तुलना में कम लेंडिंग लेवरेज की चुनौती का सामना कर रहा है।
New Development Bank (NDB), जिसे आमतौर पर ब्रिक्स बैंक के रूप में जाना जाता है, उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। हालांकि बैंक ने AA क्रेडिट रेटिंग के साथ खुद को एक भरोसेमंद उधारकर्ता के रूप में स्थापित किया है, लेकिन इसकी ऑपरेशनल स्केल और वर्ल्ड बैंक जैसे पारंपरिक संस्थानों के लेंडिंग पोर्टफोलियो की बराबरी करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
लेवरेज की चुनौती
बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती 'लेवरेज' की है। वर्ल्ड बैंक जैसे पुराने संस्थान अपनी कम पेड-इन कैपिटल को विशाल लोन पोर्टफोलियो में बदलने में माहिर हैं। इसके विपरीत, NDB का मॉडल काफी रूढ़िवादी है, जो इसके विस्तार की गति को सीमित करता है। साल 2026 के मध्य तक बैंक की कुल संपत्ति लगभग $35.7 बिलियन रही है, और अब बैंक 2022-2026 की अपनी रणनीति के तहत $30 बिलियन जुटाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो मुख्य रूप से क्लाइमेट चेंज और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए है।
गवर्नेंस और विशेषज्ञता
बैंक का गवर्नेंस मॉडल अभी भी मुख्य रूप से संस्थापक ब्रिक्स देशों के नियंत्रण में है, जो इसके विस्तार में बाधा बन सकता है। इसके अलावा, कॉम्प्लेक्स प्रोजेक्ट अप्रेजल और रिस्क मैनेजमेंट में बैंक अभी भी पुरानी संस्थाओं के अनुभव के स्तर तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।
क्या है नई रणनीति?
इन बाधाओं को पार करने के लिए, NDB अब लोकल करेंसी लेंडिंग पर जोर दे रहा है। भारतीय रुपया (Indian Rupee) या साउथ अफ्रीकन रैंड में लोन देकर बैंक अपने सदस्य देशों को फॉरेक्स मार्केट की अस्थिरता से बचाना चाहता है। भारत में रुपया बॉन्ड प्रोग्राम की योजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, ताकि वैश्विक डेट मार्केट पर निर्भरता कम की जा सके।
