मुंबई की वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी Neo Group ने Peak XV Partners के नेतृत्व में एक नए फंडिंग राउंड में करीब ₹350 करोड़ जुटाए हैं। इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी नए शहरों में अपनी पहुंच बढ़ाने और हाई-नेट-वर्थ क्लाइंट्स के लिए खास फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स तैयार करने में करेगी। फिलहाल कंपनी ₹1.3 लाख करोड़ की संपत्ति का प्रबंधन कर रही है।
Neo Group का विस्तार जारी, ₹350 करोड़ का नया फंड जुटाया
मुंबई की जानी-मानी वेल्थ और एसेट मैनेजमेंट फर्म Neo Group अपने विस्तार को लेकर पूरी तरह तैयार है। कंपनी ने हाल ही में एक नए फंडिंग राउंड में करीब ₹350 करोड़ जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व लंबे समय से कंपनी में निवेश कर रही Peak XV Partners ने किया है। यह निवेश ऐसे समय में आया है जब इसी साल TVS Capital ने भी कंपनी में ₹550 करोड़ का बड़ा निवेश किया था, जो फर्म के बैलेंस शीट में तेज ग्रोथ को दिखाता है।
ऑपरेशंस का विस्तार और नए प्रोडक्ट्स
इस नए फंड के साथ, Neo Group भारतीय वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। फिलहाल कंपनी 30 से ज्यादा शहरों में ऑपरेट कर रही है और 850 से अधिक लोगों को रोजगार देती है। कंपनी की योजना नए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी में निवेश करने के साथ-साथ और ज्यादा सीनियर वेल्थ एडवाइजर्स को हायर करने की है। कंपनी का मैनेजमेंट का कहना है कि हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स और फैमिली ऑफिसेज के लिए मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए यह फंड जुटाना बेहद जरूरी है।
एसेट्स में ग्रोथ और रेवेन्यू मॉडल
30 जून तक, Neo Group के कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट और एडवाइजरी का आंकड़ा बढ़कर करीब ₹1.3 लाख करोड़ हो गया है, जो मार्च में ₹1 लाख करोड़ था। निवेशकों के लिए कंपनी की स्टेबिलिटी को समझने का एक अहम पहलू इसका फी स्ट्रक्चर है। कुल एसेट बेस में से करीब ₹50,000 करोड़ ऐसी एसेट्स हैं जिनसे लगातार फी इनकम आती है। यह इनकम आमतौर पर ट्रांजेक्शन-बेस्ड कमीशन की तुलना में ज्यादा भरोसेमंद मानी जाती है, जिससे एसेट मैनेजर को एक स्थिर कैश फ्लो मिलता है।
निवेशकों का भरोसा और वैल्यूएशन
Peak XV Partners Neo Group के एक पुराने निवेशक रहे हैं। उन्होंने अक्टूबर 2023 में करीब $35 मिलियन का शुरुआती निवेश किया था। इसके अलावा, अगस्त 2024 में ₹400 करोड़ के एक बड़े फंडिंग राउंड में भी उन्होंने हिस्सा लिया था, जिसमें MUFG Bank और Euclidean Capital जैसे बड़े संस्थागत निवेशक भी शामिल थे। इस नए राउंड के बाद, Neo Group का कुल इक्विटी कैपिटल लगभग ₹3,000 करोड़ तक पहुंच गया है।
प्राइवेट इक्विटी फंडिंग निवेशकों का भरोसा तो दिखाती है, लेकिन कंपनी पर हाई ग्रोथ रेट बनाए रखने और अपने मार्जिन्स को बढ़ाने का दबाव भी बढ़ा देती है। कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इस फंड का इस्तेमाल अपने एसेट मैनेजमेंट आर्म में कितनी अच्छी तरह करती है, खासकर प्राइवेट क्रेडिट, इंफ्रास्ट्रक्चर और अनलिस्टेड कंपनी इन्वेस्टमेंट्स जैसे सेगमेंट्स में। जैसे-जैसे कंपनी का एसेट बेस बढ़ रहा है, निवेशक इसकी प्रॉफिटेबिलिटी और प्राइवेट क्रेडिट व अनलिस्टेड एसेट सेगमेंट से जुड़े रिस्क को मैनेज करने की क्षमता पर अपडेट की उम्मीद करेंगे, जहां पब्लिक मार्केट प्रोडक्ट्स की तुलना में लिक्विडिटी कम हो सकती है।
