Neo Alternative Asset Managers ने अपने दूसरे प्राइवेट क्रेडिट फंड के जरिए **₹6,200 करोड़** की पूंजी जुटाई है। यह फंड मिड-मार्केट भारतीय कंपनियों को स्ट्रक्चर्ड फाइनेंसिंग उपलब्ध कराएगा। ध्यान दें कि यह एक प्राइवेट इन्वेस्टमेंट व्हीकल है, न कि शेयर बाजार में लिस्टेड कोई कंपनी।
Neo Alternative Asset Managers (NAAM) ने अपने दूसरे स्पेशल क्रेडिट अपॉर्चुनिटीज फंड (NSCOF-II) को सफलतापूर्वक क्लोज कर लिया है। कंपनी ने ₹5,000 करोड़ का लक्ष्य रखा था, जिसे पार करते हुए उन्होंने ₹6,200 करोड़ का बड़ा कॉर्पस जुटा लिया है। यह 24% की अतिरिक्त बढ़ोतरी भारतीय प्राइवेट क्रेडिट मार्केट के प्रति निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।\n\n### फंड की रणनीति क्या है?\n\nSEBI-रजिस्टर्ड कैटेगरी-II AIF के रूप में, यह फंड स्थापित और EBITDA-पॉजिटिव भारतीय कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करेगा। कंपनी का लक्ष्य 35 से 40 कंपनियों का पोर्टफोलियो तैयार करना है, जिसमें प्रति ट्रांजैक्शन ₹150 करोड़ से ₹500 करोड़ तक का निवेश किया जा सकता है। यह पूंजी मुख्य रूप से ग्रोथ, अधिग्रहण या रिफाइनेंसिंग की जरूरतों को पूरा करने के लिए दी जाएगी।\n\n### तेजी से बढ़ता दायरा\n\nजून 2024 में कंपनी ने अपने पहले फंड (NSCOF-I) को ₹2,575 करोड़ के साथ क्लोज किया था। दूसरे फंड में इतनी बड़ी रकम जुटाना बताता है कि निवेशक अब पारंपरिक इक्विटी और बॉन्ड मार्केट से हटकर प्राइवेट डेट जैसे विकल्पों में ज्यादा रुचि ले रहे हैं।\n\n### निवेशकों के लिए चेतावनी\n\nयह स्पष्ट करना जरूरी है कि Neo Alternative Asset Managers एक प्राइवेट, अनलिस्टेड कंपनी है। यह आम निवेशकों के लिए स्टॉक एक्सचेंज (NSE/BSE) पर उपलब्ध नहीं है। इसमें निवेश केवल संस्थागत निवेशकों और हाई-नेट-वर्थ व्यक्तियों तक ही सीमित है।\n\n### जोखिम और लिक्विडिटी\n\nइस एसेट क्लास में निवेश करना जोखिम मुक्त नहीं है। क्रेडिट रिस्क सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि कर्ज लेने वाली कंपनियों के डिफॉल्ट होने का डर रहता है। साथ ही, यह फंड लिक्विड नहीं है, यानी पैसा मैच्योरिटी तक लॉक रहता है और इसे आसानी से निकाला नहीं जा सकता। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी इस ₹6,200 करोड़ को कितनी कुशलता से निवेश करती है और पोर्टफोलियो की गुणवत्ता कैसी रहती है।
