फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक सचिन बंसल की फिनटेक फर्म Navi Technologies ने दोबारा पब्लिक मार्केट में कदम रखने की तैयारी कर ली है। कंपनी अगले साल यानी 2027 की पहली तिमाही तक ₹3,000 करोड़ जुटाने के लिए IPO फाइल कर सकती है। यह कंपनी का दूसरा प्रयास है, पिछला IPO 2022 में टाला गया था।
Navi का IPO प्लान: एक नई शुरुआत
फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक सचिन बंसल द्वारा स्थापित Navi Ltd, एक बार फिर स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने की तैयारी में है। बेंगलुरु स्थित यह फिनटेक कंपनी अगले साल, यानी जनवरी से मार्च 2027 के बीच अपने IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर फाइल करने की योजना बना रही है। इसका लक्ष्य लगभग ₹3,000 करोड़ जुटाना है। इस पब्लिक इश्यू में नए शेयर जारी करने के साथ-साथ ऑफर-फॉर-सेल (OFS) का भी हिस्सा शामिल होने की उम्मीद है। Kotak Investment Banking इस प्रक्रिया में कंपनी को सलाह दे रहा है।
पब्लिक लिस्टिंग की राह: दूसरी कोशिश
यह Navi के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होने का दूसरा प्रयास है। इससे पहले, कंपनी ने 2022 में ₹3,350 करोड़ के IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे और SEBI से मंजूरी भी मिल गई थी। हालांकि, उस समय बाजार में आई अस्थिरता और टेक कंपनियों के लिए मुश्किल माहौल को देखते हुए कंपनी ने अपना प्लान टाल दिया था।
पब्लिक इश्यू लॉन्च करने से पहले, Navi अपनी पहली बड़ी एक्सटर्नल इक्विटी फंडिंग जुटाने के लिए बातचीत कर रही है। खबरों के मुताबिक, डच निवेशक Prosus इस बातचीत में सबसे आगे हैं। इस प्री-IPO राउंड का मकसद पब्लिक ऑफरिंग से पहले कंपनी के लिए एक स्पष्ट वैल्यूएशन बेंचमार्क तय करना है। वैल्यूएशन को लेकर चर्चाएं जारी हैं, कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी ₹13,000 करोड़ के वैल्यूएशन का लक्ष्य रख सकती है।
कंपनी का बिजनेस मॉडल और प्रदर्शन
2018 में शुरुआत के बाद से, Navi एक डिजिटल लेंडिंग स्टार्टअप से एक मल्टी-फेसटेड फाइनेंशियल सर्विसेज प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित हुई है। अब यह पर्सनल और होम लोन, हेल्थ इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड और UPI पेमेंट जैसी सेवाएं प्रदान करती है।
जैसे-जैसे बिजनेस परिपक्व हुआ है, कंपनी के फाइनेंशियल प्रदर्शन में भी उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। फाइनेंशियल ईयर 2024 में, कंपनी ने ₹358.5 करोड़ का आफ्टर-टैक्स प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में दर्ज ₹119.3 करोड़ के लॉस से एक बड़ा सुधार है। 2023 में, कंपनी ने अपने माइक्रोफाइनेंस आर्म, Chaitanya India Fin Credit को ₹1,479 करोड़ में बेचकर अपने ऑपरेशंस को सुव्यवस्थित किया था।
रेगुलेटरी इतिहास और निगरानी
निवेशकों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि Navi के नॉन-बैंकिंग फाइनेंस आर्म, Navi Finserv को पहले रेगुलेटरी जांच का सामना करना पड़ा था। अक्टूबर 2024 में, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने कंपनी और तीन अन्य लेंडर्स पर उच्च ब्याज दर मूल्य निर्धारण संबंधी चिंताओं के कारण नए लोन जारी करने पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया था। RBI द्वारा कंपनी की संशोधित प्रक्रियाओं और अनुपालन प्रयासों से संतुष्ट होने के बाद दिसंबर 2024 में ये प्रतिबंध हटा दिए गए थे।
जैसे-जैसे कंपनी पब्लिक लिस्टिंग के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही है, मार्केट ऑब्जर्वर संभवतः रेगुलेटरी दिशानिर्देशों के भीतर रहते हुए ग्रोथ बनाए रखने की इसकी क्षमता पर नजर रखेंगे। प्री-IPO फंडिंग राउंड की प्रगति और फाइनल IPO स्ट्रक्चर पर कोई भी अपडेट आने वाले महीनों में निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण डेवलपमेंट होंगे।
