Nagpur District Consumer Disputes Redressal Commission ने Edelweiss Tokio Life Insurance के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। कंपनी को एक डेथ क्लेम के मामले में **₹50 लाख** का भुगतान करने का आदेश दिया गया है, जो कंपनी के लिए एक और बड़ी मुसीबत है।
नागपुर उपभोक्ता आयोग ने Edelweiss Tokio Life Insurance को सेवा में कमी का दोषी पाया है। आयोग ने कंपनी को ₹50 लाख की डेथ बेनिफिट राशि 9% वार्षिक ब्याज के साथ चुकाने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त, कंपनी को मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के लिए ₹20,000 का भुगतान भी करना होगा।
क्या था पूरा विवाद?
यह मामला एक पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद क्लेम रिजेक्ट होने से जुड़ा था। बीमा कंपनी का आरोप था कि पॉलिसीधारक ने अपनी मेडिकल हिस्ट्री (डायबिटीज, हाइपरटेंशन और शराब का सेवन) छुपाई थी। हालांकि, आयोग की जांच में सामने आया कि बीमाधारक ने मेडिकल जांच के दौरान अपनी आदतों का खुलासा किया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियां सामान्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का बहाना बनाकर क्लेम को खारिज नहीं कर सकतीं, खासकर तब जब कंपनी के खुद के डॉक्टरों ने पॉलिसी जारी करते समय कोई खामी नहीं पकड़ी थी।
रेगुलेटरी दबाव और वित्तीय स्थिति
Edelweiss Tokio Life के लिए यह कानूनी झटका ऐसे समय में आया है जब वह पहले से ही भारी दबाव में है। अगस्त 2026 में IRDAI ने मैनेजमेंट खर्चों के उल्लंघन के कारण कंपनी के नए ब्रांच खोलने पर 6 महीने की रोक लगा दी थी। इससे पहले, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और आउटसोर्सिंग में खामियों के लिए कंपनी पर ₹1 करोड़ का जुर्माना भी लग चुका है। कंपनी के फाइनेंशियल प्रदर्शन की बात करें तो, हालिया तिमाही में इसका घाटा बढ़कर ₹34 करोड़ पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में महज ₹4 करोड़ था।
पैरेंट कंपनी पर असर
पैरेंट कंपनी Edelweiss Financial Services के लिए राहत की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को Anugrah Stock & Broking डिफॉल्ट मामले में Edelweiss Custodial Services को बड़ी राहत देते हुए ₹900 करोड़ की देनदारी से मुक्त कर दिया है। हालांकि, निवेशकों की नजरें अब भी इंश्योरेंस आर्म की खराब परफॉर्मेंस और रेगुलेटरी अनुपालन को सुधारने की क्षमता पर टिकी हैं।
