NaBFID ने अपने पहले 10-वर्षीय डॉलर-डिनॉमिनेटेड बॉन्ड के जरिए **$750 मिलियन** जुटाए हैं। निवेशकों की भारी दिलचस्पी के चलते कंपनी को **$2 बिलियन** से ज्यादा की बोलियां मिलीं, जो इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को रफ्तार देने में बड़ी भूमिका निभाएंगी।
भारी डिमांड के बाद मिली सफलता
NaBFID की इंटरनेशनल डेट मार्केट में यह पहली सफल दस्तक है। निवेशकों के जबरदस्त रिस्पॉन्स के कारण इश्यू को शुरुआती अनुमानों से 25 बेसिस पॉइंट्स नीचे प्राइस किया गया। बॉन्ड की फाइनल कूपन रेट 6.1220% तय की गई, जो इसे निवेशकों के लिए काफी आकर्षक बनाती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ा फंड
यह बॉन्ड इश्यू NaBFID की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत कंपनी 2026 के अंत तक ऑफशोर मार्केट से कुल $4 बिलियन जुटाना चाहती है। इससे पहले भी कंपनी ने अगस्त में $850 मिलियन की एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग और मार्च में $125 मिलियन का डॉलर लोन लिया था। यह सारी राशि भारत के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड करने में इस्तेमाल की जाएगी।
RBI स्वैप सुविधा का मिला बूस्ट
इस इश्यू की सफलता के पीछे Reserve Bank of India (RBI) की स्वैप फैसिलिटी का बड़ा हाथ रहा है। इस सुविधा के जरिए सरकारी संस्थाओं को रुपये और डॉलर के बीच के करेंसी रिस्क को हेज करने में मदद मिलती है, वह भी सब्सिडी वाली लागत पर। इस मदद से NaBFID अपनी बॉरोइंग कॉस्ट को काफी प्रभावी ढंग से मैनेज कर पा रही है।
बैलेंस शीट को मजबूती
ग्लोबल मार्केट में अपनी पहचान बनाने के बाद, NaBFID अब Power Finance Corporation जैसी दिग्गज सरकारी कंपनियों की कतार में शामिल हो गई है। यह कदम संस्था की फंडिंग के अलग-अलग रास्तों को डायवर्सिफाई करने की क्षमता को दर्शाता है, जो लंबी अवधि के इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के लिए एक अच्छी खबर है।
