NaBFID का बड़ा कदम: मुंबई में खोला ट्रेनिंग हब, इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग की राह होगी आसान?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
NaBFID का बड़ा कदम: मुंबई में खोला ट्रेनिंग हब, इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग की राह होगी आसान?
Overview

नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (NaBFID) ने मुंबई में इंस्टीट्यूट फॉर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की शुरुआत की है। इसका मकसद प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग को प्रोफेशनल बनाना और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में एक्सपर्टाइज की कमी को दूर करना है।

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इंस्टीट्यूट फॉर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का शुभारंभ

नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (NaBFID) ने मुंबई में इंस्टीट्यूट फॉर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (IID) की शुरुआत करके एक बड़ा कदम उठाया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि सिर्फ पूंजी देना ही काफी नहीं है, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को सफल बनाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता, जैसे कि सही मूल्यांकन (Appraisal), जोखिम प्रबंधन (Risk Assessment) और रेगुलेटरी कंप्लायंस (Regulatory Compliance) की भी सख्त जरूरत है। इस ट्रेनिंग सेंटर के जरिए NaBFID कोशिश कर रहा है कि प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग में ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) की प्रक्रियाओं को एक मानक पर लाया जा सके।

क्यों पड़ी इस ट्रेनिंग की जरूरत?

यह नया इंस्टीट्यूट डेवलपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन (Development Financial Institution) के तौर पर काम करेगा। मार्केट के मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर क्रेडिट सेक्टर अभी भी बिखरा हुआ है। कई फाइनेंसियल प्लेयर्स को सेक्टर-स्पेसिफिक फाइनेंशियल अप्रेजल (Financial Appraisal) और एनवायर्नमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट (Environmental Impact Assessment) में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिससे प्रोजेक्ट्स की क्लोजिंग में देरी होती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैंक मैनेजमेंट (National Institute of Bank Management) के साथ पार्टनरशिप करके, NaBFID इस तकनीकी कमी को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। ट्रेनिंग में एंटिटी अप्रेजल (Entity Appraisal) और पोस्ट-डिस्पर्समेंट मॉनिटरिंग (Post-Disbursement Monitoring) जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा।

क्या सब ठीक हो जाएगा?

हालांकि, इस ट्रेनिंग सेंटर के फायदे साफ हैं, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स की क्वालिटी को लेकर कुछ चिंताएं भी हैं। आलोचकों का कहना है कि बड़े प्रोजेक्ट्स के फेल होने की हिस्ट्री रही है, जिसका कारण अक्सर राजनीतिक दखलअंदाजी, जमीन अधिग्रहण में दिक्कतें और उम्मीद से ज्यादा रेवेन्यू का अनुमान लगाना रहा है। एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि सिर्फ ट्रेनिंग से ये समस्याएं हल नहीं होंगी। अगर एक्सपर्ट्स की टीम भी हो, तब भी सरकारी निकायों (Urban Local Bodies) और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) स्ट्रक्चर्स से जुड़े स्ट्रक्चरल रिस्क (Structural Risks) लोन देने में रुकावट बन सकते हैं। साथ ही, सिर्फ इंटरनल ट्रेनिंग मॉड्यूल पर निर्भर रहने से ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिसेज (Global Best Practices) को अपनाने में देर हो सकती है।

आगे का रास्ता

भविष्य में, NaBFID इस प्रोग्राम को स्टेट-लेवल एंटिटीज (State-level Entities) और म्युनिसिपल बॉडीज (Municipal Bodies) तक फैलाने की योजना बना रहा है। अगर यह इंस्टीट्यूट शहरी स्थानीय निकायों को अपने रिस्क-असेसमेंट फ्रेमवर्क (Risk-Assessment Frameworks) सिखाने में सफल होता है, तो यह बैंक योग्य प्रोजेक्ट्स की एक बेहतर पाइपलाइन बनाने में मदद कर सकता है। इन्वेस्टर एंगेजमेंट (Investor Engagement) और फाइनेंशियल स्ट्रक्चरिंग (Financial Structuring) पर फोकस यह भी बताता है कि भविष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स के लिए बॉन्ड मार्केट (Bond Market) को मजबूत करने का लक्ष्य हो सकता है, ताकि पारंपरिक बैंक लोन के अलावा फंडिंग के और भी तरीके मिल सकें।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.