NSE और Jio IPO: वैल्यूएशन तय करेगा निवेशकों का रिटर्न, कहीं महंगा न पड़ जाए ये 'बिग डील'

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
NSE और Jio IPO: वैल्यूएशन तय करेगा निवेशकों का रिटर्न, कहीं महंगा न पड़ जाए ये 'बिग डील'

NSE और Jio Platforms जल्द ही बड़े IPO लाने की तैयारी में हैं, जिनकी कुल कीमत करीब ₹70,000 करोड़ (NSE के ₹32,000 करोड़ और Jio के ₹38,000 करोड़) हो सकती है। दोनों कंपनियां अपने-अपने सेक्टर की लीडर हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि ऊंचे वैल्यूएशन पर लिस्ट होने वाली मजबूत कंपनियां भी निवेशकों को खास रिटर्न नहीं दे पातीं। ऐसे में, निवेशकों को सिर्फ ब्रांड नाम पर नहीं, बल्कि मार्केट के औसत के मुकाबले प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल पर ध्यान देना होगा।

क्या है बड़ी बात?

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) जल्द ही भारतीय शेयर बाजार में दो सबसे बड़े इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने वाले हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स अपने डेट को कम करने के लिए करीब ₹38,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। वहीं, NSE का IPO करीब ₹32,000 करोड़ का होने की उम्मीद है। यह ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale) के रूप में होगा, जिसमें मौजूदा शेयरहोल्डर्स जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और मॉर्गन स्टेनली द्वारा मैनेज किए जाने वाले स्पेशल पर्पज व्हीकल अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।

वैल्यूएशन पर बहस

भले ही ये कंपनियां बहुत जानी-मानी हों, लेकिन निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि उन्हें ये शेयर किस कीमत पर मिलेंगे। एनालिस्ट्स के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल 41x से 43x के बीच रह सकता है। इसकी तुलना अक्सर भारती एयरटेल से की जाती है, जिसका एंटरप्राइज वैल्यू टू EBITDA 13x के आसपास है। हालांकि, जियो की तुलना सीधी नहीं है क्योंकि इसमें सिर्फ टेलीकॉम नहीं, बल्कि जियो सिनेमा, जियो फाइनेंस और AI जैसे कारोबार भी शामिल हैं।

NSE के लिए, एनालिस्ट्स का अनुमानित P/E मल्टीपल करीब 43x है। यह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के 63x P/E से कम है, लेकिन फिर भी कई जानकारों के लिए 43x महंगा माना जा रहा है। निवेशकों के लिए मुख्य प्रश्न यही है कि क्या इन कंपनियों की ग्रोथ की संभावनाएं इस प्रीमियम कीमत को सही ठहरा पाएंगी?

पिछले IPOs से सीख

इतिहास हमें याद दिलाता है कि सिर्फ मजबूत फंडामेंटल्स वाली कंपनियां अच्छा स्टॉक रिटर्न नहीं देतीं, अगर उनकी एंट्री प्राइस ही बहुत ज्यादा हो। कई बड़े भारतीय IPO लिस्टिंग के बाद इसलिए संघर्ष करते दिखे क्योंकि उन्हें ऊंचे प्रीमियम पर पेश किया गया था। उदाहरण के लिए, लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) 186x P/E पर 2022 में लिस्ट हुई और तब से इसका रिटर्न बहुत सीमित रहा है। इसी तरह, 2024 के अंत में 24x P/E पर लिस्ट हुई हुंडई मोटर का IPO भी उम्मीदों से कम प्रदर्शन कर रहा है। वन97 कम्युनिकेशंस (Paytm) का स्टॉक भी 2021 में हाई-प्रोफाइल लिस्टिंग के बाद से गिरा है।

मार्केट एवरेज क्यों जरूरी है?

भारत की सबसे बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाला निफ्टी 50 (Nifty 50) फिलहाल औसतन 21x P/E पर ट्रेड कर रहा है। जब IPOs को इस मार्केट एवरेज से काफी प्रीमियम पर कीमत दी जाती है, तो उनके अंडरपरफॉर्म करने का जोखिम बढ़ जाता है। डेटा बताता है कि ऊंचे वैल्यूएशन पर शेयर खरीदने से, खासकर जब पूरा मार्केट ही महंगे मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा हो, तो रिटेल निवेशकों के लिए प्राइस एप्रिसिएशन की गुंजाइश कम हो जाती है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

इन आने वाले IPOs में निवेशकों के लिए सबसे अहम फैक्टर कंपनी की कमाई के अनुमानों के मुकाबले फाइनल ऑफर प्राइस होगा। निवेशकों को 'मेगा' साइज और ब्रांड पहचान से आगे बढ़कर सेक्टर के अन्य प्रतिस्पर्धियों और ब्रॉडर मार्केट एवरेज के मुकाबले वैल्यूएशन मल्टीपल का मूल्यांकन करना चाहिए। प्राइस-टू-अर्निंग रेशियो (P/E Ratio) को ट्रैक करना और यह देखना कि यह मौजूदा निफ्टी 50 एवरेज की तुलना में कैसा है, यह समझने का एक महत्वपूर्ण कदम होगा कि क्या यह ऑफर उचित मूल्य पर है।

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