मुनाफे में ज़बरदस्त उछाल, पर रेवेन्यू पर नज़र
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3FY26) के लिए अपने नतीजे पेश कर दिए हैं, जिसमें 15% की ज़बरदस्त तिमाही दर तिमाही (QoQ) बढ़ोतरी के साथ नेट प्रॉफिट ₹2,408 करोड़ दर्ज किया गया है। इस बेहतरीन परफॉरमेंस के पीछे कंसोलिडेटेड एक्सपेंडिचर में 48% की भारी कटौती रही, जो घटकर ₹1,234 करोड़ हो गया। साथ ही, ऑपरेटिंग ईबीआईटीडीए (Operating EBITDA) में 92% का शानदार उछाल देखकर ₹2,851 करोड़ पर पहुंच गया। एक्सचेंज की मुख्य कमाई का जरिया, ट्रांजेक्शन चार्जेज़, में भी 9% की बढ़त देखी गई, जो ₹3,033 करोड़ पर पहुंच गया, इसका कारण इक्विटी कैश और डेरिवेटिव्स सेगमेंट में बढ़ा हुआ ट्रेडिंग वॉल्यूम रहा। लिस्टिंग सर्विसेज रेवेन्यू में भी 25% की प्रभावशाली QoQ ग्रोथ दर्ज हुई। हालांकि, अगर हम थोड़ी लंबी तस्वीर देखें, तो 9 महीनों (9MFY26) के लिए कंसोलिडेटेड इनकम ₹13,354 करोड़ रही, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹14,780 करोड़ से कम है।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा और रेगुलेटरी एक्शन
NSE भारतीय स्टॉक एक्सचेंज बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है, कई सेगमेंट्स में 90% से अधिक मार्केट शेयर के साथ। लेकिन, हालिया आंकड़े दर्शाते हैं कि बीएसई लिमिटेड (BSE Ltd.) के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, खासकर फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में। यहाँ NSE का मार्केट शेयर FY25 के 74% से घटकर FY26 की पहली छमाही में 61% रह गया, जबकि BSE की हिस्सेदारी बढ़कर 38% हो गई। इस बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ, रेगुलेटरी चौकसी भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर है। NSE ने हाल ही में 'डब्बा ट्रेडिंग' रैकेट्स को लेकर चेतावनी जारी की है। यह एक अवैध, ऑफ-मार्केट ट्रेडिंग एक्टिविटी है जो गारंटीड रिटर्न का वादा करती है। एक्सचेंज ने ऐसे संबंधित एंटिटीज के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। यह कदम बाजार की अखंडता बनाए रखने और निवेशकों को धोखाधड़ी वाली योजनाओं से बचाने के प्रति एक्सचेंज की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
IPO की तैयारी और वैल्यूएशन
NSE के लंबे समय से प्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की तैयारियां ज़ोरों पर हैं। बाजार रेगुलेटर SEBI ने हाल ही में एक बड़ी बाधा को दूर करते हुए एक्सचेंज को 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' दे दिया है। अनलिस्टेड NSE शेयर्स में निवेशकों की दिलचस्पी काफी बढ़ गई है, और हालिया ट्रेडों में एक्सचेंज का वैल्यूएशन लगभग $58 बिलियन (या ₹5.3 ट्रिलियन) के पार जा चुका है। यह वैल्यूएशन NSE को दुनिया के सबसे मूल्यवान एक्सचेंजों में से एक बनाता है, जो Nasdaq Inc. को पछाड़ सकता है और Deutsche Boerse AG के वैल्यूएशन के करीब पहुँच सकता है। कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि NSE के अनलिस्टेड शेयर ₹4,000 प्रति शेयर के अनुमानित उचित मूल्य से नीचे कारोबार कर रहे हैं, लेकिन इसका मजबूत अर्निंग प्रोफाइल इसे प्रीमियम वैल्यूएशन के लायक बनाता है। यह IPO, जिसमें Temasek और LIC जैसे मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी बिकने की उम्मीद है, भारत के सबसे बड़े पब्लिक ऑफरिंग्स में से एक हो सकता है। IPO की कहानी को NSE के मजबूत वित्तीय विकास से भी बल मिलता है, जिसमें FY19 और FY24 के बीच रेवेन्यू ₹3,028 करोड़ से बढ़कर ₹16,434 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹1,708 करोड़ से बढ़कर ₹8,306 करोड़ हो गया।
मार्केट का माहौल और आगे की रणनीति
NSE का ऑपरेशनल परफॉरमेंस सीधे तौर पर भारतीय कैपिटल मार्केट्स, खासकर डेरिवेटिव्स सेगमेंट से जुड़ा हुआ है। भारत के डेरिवेटिव्स मार्केट ने हाल के वर्षों में काफी ग्रोथ देखी है, जिसमें रिटेल निवेशकों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, हालांकि यह भी देखा गया है कि एक बड़ा प्रतिशत रिटेल निवेशक नुकसान उठाते हैं। डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स वॉल्यूम में NSE भले ही आगे हो, लेकिन BSE से प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। मार्केट शेयर वापस पाने के लिए एक्सचेंज अपनी डेरिवेटिव्स एक्सपायरी तारीखों को गुरुवार से मंगलवार तक बदलने की रणनीति पर काम कर रहा है। ट्रेडिंग वॉल्यूम में ग्रोथ, जो NSE की आय का मुख्य जरिया है, मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर्स, निवेशक सेंटीमेंट और रेगुलेटरी नीतियों से प्रभावित होती है। 'डब्बा ट्रेडिंग' जैसी अवैध गतिविधियों के खिलाफ एक्सचेंज का सक्रिय रुख निवेशक विश्वास बनाए रखने और बाजार के समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।