रेगुलेटरी अड़चनें दूर, IPO की राह आसान
बाजार नियामक SEBI के साथ NSE का लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब सुलझने की कगार पर है। इस सेटलमेंट के करीब पहुंचने की खबरों से एक्सचेंज की पब्लिक लिस्टिंग की राह खुल गई है, जो 2016 से अटकी हुई थी। यह डेवलपमेंट इस साल के सबसे बड़े और बहुप्रतीक्षित पब्लिक ऑफर में से एक के रूप में देखा जा रहा है।
IPO वैल्यूएशन और शेयर बिक्री की डिटेल्स
NSE के IPO के लिए प्राइवेट मार्केट में $55 अरब का वैल्यूएशन तय किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इस शेयर सेल (Share Sale) की कुल कीमत $2.75 अरब तक पहुंच सकती है। इसमें Temasek Holdings, Canada Pension Plan Investment Board (CPPIB), Life Insurance Corporation (LIC), State Bank of India (SBI), और ChrysCapital जैसे करीब 20 प्रमुख शेयरधारक अपनी लगभग 5% हिस्सेदारी बेचेंगे। यह उन निवेशकों के लिए एक बड़ी लिक्विडिटी (Liquidity) का मौका होगा और यह भारतीय बाजार में इस साल के सबसे बड़े ऑफर्स में से एक हो सकता है।
NSE का मजबूत फाइनेंशियल प्रदर्शन
दुनिया के सबसे व्यस्त इक्विटी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, NSE ने तीसरी तिमाही में दमदार परफॉरमेंस दिखाई है। 31 दिसंबर को समाप्त हुई तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 15% बढ़कर ₹2,408 करोड़ रहा। वहीं, ऑपरेशन्स से रेवेन्यू (Revenue) पिछले क्वार्टर से करीब 7% बढ़ा, जिसका मुख्य कारण डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में आई मजबूती है।
लिस्टिंग की चुनौतियां और वैल्यूएशन
SEBI के साथ सेटलमेंट, NSE के लिस्टिंग में सबसे बड़ी बाधा को दूर करेगा। हालांकि, 1,77,807 से अधिक शेयरधारकों के बड़े बेस को मैनेज करना एक्सचेंज के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। NSE का $55 अरब का प्रस्तावित वैल्यूएशन इसके घरेलू प्रतिद्वंद्वी BSE Ltd से काफी अधिक है। BSE Ltd, जिसने 2017 में लिस्टिंग की थी, उसका मार्केट कैप $7 अरब से $10 अरब के बीच है। NSE का यह वैल्यूएशन उसकी लगातार डोमिनेंस और ग्रोथ की उम्मीदों को दर्शाता है।
सप्लाई का डर और वैल्यूएशन पर सवाल
करीब 5% की यह बड़ी हिस्सेदारी की बिकवाली लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमतों पर दबाव बना सकती है, जिसे 'सप्लाई ओवरहैंग' कहते हैं। साथ ही, 1,77,000 से अधिक शेयरधारकों का बेस उन इंस्टीट्यूशंस के लिए चिंता का विषय बन सकता है जो लिक्विडिटी को महत्व देते हैं। ऐतिहासिक SEBI केस में कुछ गवर्नेंस और सिस्टम इंटीग्रिटी के मुद्दे उठे थे, जिनके केवल मॉनेटरी सेटलमेंट से पूरी तरह सुलझने पर सवाल बने हुए हैं। BSE की तुलना में यह हाई वैल्यूएशन दिखाता है कि परफेक्ट एग्जीक्यूशन की उम्मीद है; कोई भी चूक इस वैल्यूएशन को टिकाऊ नहीं बना सकती।
आगे क्या?
NSE अगले महीने SEBI के पास अपना ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस (Draft Prospectus) फाइल करने की योजना बना रहा है, जो वित्तीय नतीजे जारी होने के बाद होगा। IPO की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बाजार इतने बड़े ऑफर को कितनी अच्छी तरह अवशोषित कर पाता है।
