रेवेन्यू में बंपर उछाल, प्रॉफिट ग्रोथ में सुस्ती
National Securities Depository Ltd (NSDL) ने मार्च 2026 को समाप्त तिमाही के लिए अपने शानदार 26% के रेवेन्यू ग्रोथ के आंकड़े पेश किए हैं। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹458.25 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹363.66 करोड़ था। लेकिन, इस जोरदार टॉप-लाइन ग्रोथ के मुकाबले नेट प्रॉफिट में काफी धीमी 8.17% की बढ़ोतरी हुई। नेट प्रॉफिट ₹90.1 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹83.29 करोड़ था। यह प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव या बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों का संकेत दे सकता है।
डिविडेंड का ऐलान और शेयर का रिएक्शन
कंपनी के बोर्ड ने शेयरधारकों को खुशखबरी देते हुए फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए ₹4 प्रति शेयर के डिविडेंड (Dividend) को मंजूरी दी। इन नतीजों के बाद, गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को NSDL का शेयर मामूली उछाल के साथ ₹880.85 पर बंद हुआ। शेयर में यह सीमित प्रतिक्रिया (mild reaction) शायद इसलिए थी क्योंकि निवेशक सिर्फ रेवेन्यू बढ़ाने के बजाय प्रॉफिटेबिलिटी पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे। शेयर की ट्रेडिंग वॉल्यूम 728,520 रही।
कॉम्पिटिशन और एनालिस्ट्स की राय
NSDL ऐसे डायनामिक मार्केट में काम कर रही है जहां कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है। NSDL वैल्यू के मामले में सबसे बड़ी डिपॉजिटरी है, लेकिन उसके कॉम्पिटिटर Central Depository Services (India) Ltd (CDSL) के पास रिटेल अकाउंट्स की संख्या ज्यादा है। CDSL के शेयर हाल ही में गिरे हैं। NSDL का वैल्यूएशन, जो 47.2 से 55.59 के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो पर है, अपनी प्रॉफिट ग्रोथ रेट को देखते हुए कुछ ज्यादा लग रहा है।
एनालिस्ट्स (Analysts) NSDL पर 'Add' रेटिंग बनाए हुए हैं। Axis Capital ने ₹1,000 का टारगेट प्राइस दिया है, जबकि JM Financial ने भी 'Add' रेटिंग के साथ ₹1,290 का टारगेट सेट किया है।
मार्जिन प्रेशर और रेगुलेटरी कंसर्न
रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ के बीच इतना बड़ा अंतर मार्जिन में कमी या बढ़ते खर्चों की ओर इशारा करता है। रेगुलेटर SEBI भी बैंकों की तरह डिपॉजिटरीज पर अपनी निगरानी बढ़ा रहा है, खासकर साइबर सुरक्षा और सिस्टम रेजिलिएंस (system resilience) जैसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में। NSDL में फरवरी 2026 में आई एक तकनीकी गड़बड़ी, जिसने सेटलमेंट में देरी और ट्रेडिंग में रुकावट पैदा की, सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।
NSDL का फ्यूचर आउटलुक
एनालिस्ट्स के टारगेट प्राइस बताते हैं कि NSDL में तत्काल बड़े उछाल की संभावना कम है। भारत में वित्तीय समावेशन (financialization) का ट्रेंड डिपॉजिटरीज के लिए लॉन्ग-टर्म सपोर्ट देगा। हालांकि, NSDL को कॉम्पिटिशन और बढ़ते रेगुलेटरी दबाव का सामना करना पड़ेगा। भविष्य के नतीजे NSDL की रेवेन्यू ग्रोथ को बेहतर प्रॉफिट ग्रोथ में बदलने की क्षमता पर निर्भर करेंगे, साथ ही बदलते बाजार की स्थितियों और इंफ्रास्ट्रक्चर की मांगों को संभालने पर भी।
