NSDL के शेयर शुक्रवार को अपने लाइफटाइम लो यानी **₹734.50** के स्तर पर आ गए हैं, जो इसके **₹800** के IPO प्राइस से भी काफी नीचे है। बाजार में डीमैट अकाउंट ओपनिंग की रफ्तार धीमी पड़ने से डिपॉजिटरी सेक्टर पर दबाव साफ दिख रहा है।
धीमी पड़ गई रफ्तार
अगस्त 2025 में मार्केट में लिस्ट होने के बाद से ही NSDL का स्टॉक संघर्ष कर रहा है। निवेशकों की इस मायूसी के पीछे सबसे बड़ी वजह नए डीमैट अकाउंट खोलने की घटती संख्या है। साल 2024 में जब मार्केट में तेजी थी, तब हर महीने औसतन 3.84 मिलियन नए डीमैट खाते खुल रहे थे, लेकिन 2026 के आंकड़ों में यह संख्या घटकर 2.71 मिलियन रह गई है।
क्यों पीछे है NSDL और क्यों मजबूत है CDSL?
चूंकि डिपॉजिटरी कंपनियों की कमाई डीमैट खातों के मेंटेनेंस और ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग से होती है, इसलिए नए ग्राहकों की संख्या में कमी सीधा असर कंपनी के रेवेन्यू पर डाल रही है। दूसरी तरफ, पुरानी और लिस्टेड कंपनी CDSL का नेटवर्क अधिक पुराना और मजबूत है। ब्रोकर फर्मों के साथ पुरानी साठ-गांठ के चलते CDSL बाजार की अस्थिरता को झेलने में बेहतर स्थिति में नजर आ रही है।
आगे क्या?
NSDL के लिए चुनौती अब यह साबित करने की है कि वह घटते रिटेल उत्साह के बावजूद अपनी ग्रोथ बरकरार रख सकती है। फिलहाल मार्केट में कंपनी की वैल्यूएशन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। निवेशकों को अब आने वाले महीनों में डीमैट अकाउंट ओपनिंग के आंकड़ों और इक्विटी मार्केट टर्नओवर पर नजर रखनी होगी, क्योंकि इसी से कंपनी की भविष्य की दिशा तय होगी।
