GIFT City: NRI अब अपनी दौलत के लिए चुन रहे GIFT City, FEMA के झंझटों से मिलेगी राहत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
GIFT City: NRI अब अपनी दौलत के लिए चुन रहे GIFT City, FEMA के झंझटों से मिलेगी राहत

NRI अब अपने निवेश के लिए देश के मुख्य वित्तीय तंत्र के बजाय GIFT City के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) का रुख कर रहे हैं। यहाँ उन्हें FEMA के सख्त नियमों से आजादी मिलती है और डॉलर में वेल्थ मैनेज करना आसान हो जाता है, लेकिन निवेशकों को इसमें शामिल जोखिमों को भी समझना होगा।

भारत के बाहर रहने वाले भारतीय (NRIs) अब अपनी ग्लोबल वेल्थ को मैनेज करने के लिए ट्रेडिशनल भारतीय बैंक खातों के बजाय गुजरात स्थित GIFT City को अपना मुख्य ठिकाना बना रहे हैं। यह बदलाव उन्हें उन कठोर रेगुलेटरी पाबंदियों से बचाता है, जो मुख्य भारत में वित्तीय लेनदेन को उलझा देती हैं। International Financial Services Centre (IFSC) के जरिए अब वे बिल्कुल सिंगापुर या दुबई जैसे ऑफशोर हब की तरह निवेश कर सकते हैं, वह भी भारत की भौगोलिक सीमाओं के भीतर रहकर।

रेगुलेटरी आजादी का फायदा

आम भारतीय खातों पर Foreign Exchange Management Act (FEMA) के नियम लागू होते हैं, जहां पैसा बाहर भेजने (repatriation) की सीमाएं तय होती हैं और Form 15CA या 15CB जैसे जटिल दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। इसके विपरीत, GIFT City International Financial Services Centres Authority (IFSCA) के तहत काम करता है, जो वहां की संस्थाओं को भारत के बाहर का दर्जा देता है। इससे एनआरआई परिवारों के लिए पूंजी जुटाना और उसे मैनेज करना काफी सरल हो जाता है।

क्यों आकर्षित हो रहे हैं निवेशक?

इसका सबसे बड़ा कारण डॉलर में निवेश की सुविधा है, जो रुपये की गिरावट से होने वाले नुकसान से बचाती है। साथ ही, Section 80LA के तहत मिलने वाली 10 साल की टैक्स हॉलिडे और Securities Transaction Tax (STT) से छूट इसे और भी आकर्षक बनाती है। मार्च 2026 तक, GIFT IFSC फंड्स में कुल कमिटमेंट लगभग USD 39.09 बिलियन तक पहुंच चुकी है, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।

ध्यान रखें ये जोखिम

निवेशकों को यह समझना होगा कि GIFT City के फंड्स बैंक डिपॉजिट जैसे नहीं हैं। यहाँ निवेश अक्सर Alternative Investment Funds (AIFs) जैसे जटिल इंस्ट्रूमेंट्स में होता है, जिनमें मार्केट वोलैटिलिटी ज्यादा और लिक्विडिटी कम होती है। इसके अलावा, यहां निवेश की न्यूनतम सीमा भी काफी अधिक है, जो अक्सर USD 150,000 के आसपास होती है। यह उन लोगों के लिए है जो परिपक्व निवेशक हैं। भविष्य में अंतरराष्ट्रीय टैक्स संधियों और ग्लोबल रिपोर्टिंग मानकों में बदलाव आने पर वर्तमान टैक्स लाभ पर क्या असर पड़ेगा, इसे मॉनिटर करना भी जरूरी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.