जो NRI, डॉलर में 7% से ज़्यादा ब्याज दर वाली FCNR डिपॉजिट (FCNR Deposit) पर दांव लगाना चाहते हैं, उन्हें निकासी (Withdrawal) के नियमों को बारीकी से समझना होगा। अलग-अलग बैंकों में ये नियम और पेनाल्टी (Penalty) की शर्तें काफी अलग हैं, और **30 सितंबर, 2026** तक ही ये खास दरें उपलब्ध हैं।
Detailed Coverage
जानिए क्यों जरूरी है निकासी के नियम समझना?
आजकल कई NRI, फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) बैंक डिपॉजिट की ओर आकर्षित हो रहे हैं, खासकर अमेरिकी डॉलर (USD) पर मिल रहे आकर्षक ब्याज दर के कारण। भारतीय बैंकों में 30 सितंबर, 2026 तक एक खास रेगुलेटरी विंडो के तहत 7% या उससे ज़्यादा की दरें ऑफर की जा रही हैं। ऐसे में, बहुत से लोग इन रिटर्न को लॉक करना चाह रहे हैं। लेकिन, सिर्फ ब्याज दरें देखकर फैसला लेना गलत हो सकता है। आपको डिपॉजिट से पैसे निकालने के नियमों को बहुत ध्यान से देखना होगा, क्योंकि अगर आपको इमरजेंसी में ये पैसा निकालना पड़ा, तो ये नियम आपके रिटर्न पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
हर बैंक के नियम अलग: जानिए क्या हैं पेनाल्टी और लॉक-इन शर्तें?
पैसा निकालने के मामले में हर बैंक का अपना तरीका है, जिसमें लॉक-इन पीरियड (Lock-in Period), ब्याज दर की दोबारा गणना और फिक्स्ड पेनाल्टी शामिल होती है।
- SBI: यहां कम से कम 1 साल का लॉक-इन है, जिसके बाद ही निकासी संभव है। इसके बाद, आपको असल अवधि के हिसाब से ब्याज मिलता है।
- HDFC Bank: इस बैंक में जल्दी निकासी पर कोई पेनाल्टी नहीं है, लेकिन 1 साल पूरा होने से पहले पैसे निकालने पर ब्याज नहीं मिलेगा। एक साल बाद, मूल दर के बजाय, जमा की गई असल अवधि पर ब्याज कैलकुलेट होगा।
- Bank of Baroda: इनका नियम भी सख्त है। पहले 12 महीनों में निकासी पर शून्य ब्याज मिलेगा। उसके बाद, बुकिंग डेट या निकासी डेट, जिस पर भी ब्याज दर कम हो, उसमें से 1% घटाकर ब्याज मिलेगा।
- ICICI Bank: यहां नियम चुने गए टेन्योर (Tenure) पर निर्भर करते हैं। कुछ टेन्योर में जल्दी निकालने पर ब्याज और पेनाल्टी दोनों नहीं लगते। लेकिन, 36 से 60 महीने के डिपॉजिट पर 12 महीने का लॉक-इन है, जिसके बाद 1% की पेनाल्टी ब्याज पर लगेगी।
- Kotak Mahindra Bank: यहां USD 0.5 मिलियन या उससे ज़्यादा की डिपॉजिट पर ज़्यादा ब्याज दर मिलती है। 1 साल के लॉक-इन के बाद, 3 साल से कम टेन्योर पर 0.25% और 3 से 5 साल के टेन्योर पर 1% पेनाल्टी लगती है। ब्याज, कॉन्ट्रैक्टेड रेट या बुकिंग डेट की रेट, जो भी कम हो, उस पर मिलेगा।
NRI के लिए क्या है ध्यान रखने वाली बात?
NRI के लिए सबसे बड़ा रिस्क लिक्विडिटी (Liquidity) का है। चूंकि ये डिपॉजिट फॉरेन करेंसी में होते हैं, इसलिए मकसद कैपिटल को सुरक्षित रखते हुए ब्याज कमाना होता है। आपको यह देखना चाहिए कि बैंक 1 साल का पूरा कमिटमेंट मांग रहा है या कुछ फ्लेक्सिबल ऑप्शन भी दे रहा है। पैसा लगाने से पहले, बैंक के प्रोडक्ट डिस्क्लोजर डॉक्यूमेंट (Product Disclosure Document) को जरूर पढ़ें, क्योंकि ये नीतियां बदल सकती हैं। 30 सितंबर की डेडलाइन से पहले, अपने चुने हुए बैंक की वेबसाइट पर लेटेस्ट डिपॉजिट स्कीम और निकासी नीतियों के अपडेट्स ज़रूर चेक करें।
