NRI Deposits: विदेश से आया पैसा घटा! FCNR(B) में भारी गिरावट, NRE/NRO ने संभाला मोर्चा

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
NRI Deposits: विदेश से आया पैसा घटा! FCNR(B) में भारी गिरावट, NRE/NRO ने संभाला मोर्चा
Overview

विदेशों में रहने वाले भारतीयों (NRIs) का भारत में जमा योजनाओं में पैसा लगाने का तरीका बदल गया है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान, कुल जमा राशि **15.97%** घटकर **$11.20 बिलियन** रह गई। इसकी मुख्य वजह Foreign Currency Non-Resident (FCNR) डिपॉजिट्स में आई भारी गिरावट है, जो **$6.46 बिलियन** से घटकर केवल **$2.04 बिलियन** रह गई।

NRI डिपॉजिट्स में आई बड़ी उठापटक

विदेशों में बसे भारतीयों (NRIs) की ओर से भारत में जमा योजनाओं में निवेश का ट्रेंड बदलता दिख रहा है। अप्रैल से दिसंबर 2025 की अवधि में, कुल जमा राशि में 15.97% की कमी आई और यह $11.20 बिलियन पर आ गई, जो पिछले साल की इसी अवधि में $13.33 बिलियन थी। इस गिरावट का मुख्य कारण Foreign Currency Non-Resident (FCNR) डिपॉजिट्स, खासकर FCNR(B) खातों में आई भारी कमी है। इन खातों में नई जमा राशि घटकर $2.04 बिलियन रह गई, जबकि पिछले साल यह $6.46 बिलियन थी।

FCNR(B) डिपॉजिट्स में गिरावट की वजहें

FCNR(B) डिपॉजिट्स में इतनी बड़ी गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं। ग्लोबल और डोमेस्टिक ब्याज दरों (Interest Rate) में अंतर, और करेंसी (Currency) को लेकर भविष्य की उम्मीदें इसमें अहम भूमिका निभा रही हैं। दिसंबर 2024 की शुरुआत में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने FCNR(B) डिपॉजिट्स पर ब्याज दर की ऊपरी सीमा बढ़ाई थी, ताकि विदेशी पूंजी को आकर्षित किया जा सके। लेकिन अप्रैल-दिसंबर 2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि ऊंची ब्याज दरों के बावजूद यह गिरावट आई।

हालांकि, FCNR(B) खाते करेंसी के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रखते हैं, लेकिन भारतीय रुपये (Rupee) की चाल NRIs की भावना को प्रभावित करती है। बैंक ऑफ अमेरिका का अनुमान है कि 2026 के अंत तक रुपया $1 के मुकाबले ₹86 तक मजबूत हो सकता है। ऐसे में, रुपये में रखी जाने वाली संपत्तियों (Assets) को फायदा हो सकता है। वहीं, भारतीय शेयर बाजार (Equity Market) 2025 में मामूली सिंगल-डिजिट रिटर्न देने के बावजूद, लंबी अवधि में फिक्स्ड इनकम साधनों से बेहतर रिटर्न दे सकता है। ऐतिहासिक रूप से, फिक्स्ड डिपॉजिट्स (FDs) पर 7-9% तक का अच्छा यील्ड मिल रहा है।

NRE और NRO डिपॉजिट्स की मजबूती

FCNR(B) डिपॉजिट्स में गिरावट के विपरीत, Non-Resident External (NRE) और Non-Resident Ordinary (NRO) खातों ने अच्छी मजबूती दिखाई है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान NRE खातों में $5.06 बिलियन की जमा राशि आई, जो पिछले साल इसी अवधि के $3.57 बिलियन से काफी ज्यादा है। इसी तरह, NRO खातों में $4.10 बिलियन जमा हुए, जबकि पहले यह $3.29 बिलियन थे। ये रुपये-आधारित खाते, खासकर NRE, NRIs के लिए कमाई को भारत भेजने का अहम जरिया हैं। इन खातों में लगातार आ रहा पैसा भारतीय अर्थव्यवस्था में NRIs के विश्वास और रुपये-आधारित निवेशों को तरजीह देने का संकेत देता है। कुल मिलाकर, दिसंबर 2025 तक NRIs की कुल बकाया जमा राशि बढ़कर $169.27 बिलियन हो गई, जो दिसंबर 2024 के $161.80 बिलियन से अधिक है। यह दर्शाता है कि NRIs पैसा निकाल नहीं रहे, बल्कि उसे एक जगह से दूसरी जगह (Reallocate) कर रहे हैं।

आगे का अनुमान

भविष्य में NRIs की जमा राशि की दिशा ग्लोबल ब्याज दरें, भारतीय रुपये का प्रदर्शन और घरेलू आर्थिक नीतियां तय करेंगी। हालांकि कुछ अनुमान रुपये के मजबूत होने की ओर इशारा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निकट अवधि में दबाव बना रह सकता है। RBI की ब्याज दरों में बदलाव की पहल (जैसे FCNR(B) की सीमा बढ़ाना) पूंजी आकर्षित करने की उसकी मंशा दर्शाती है। लेकिन, रियल एस्टेट (Real Estate) जैसे वैकल्पिक निवेश माध्यमों में NRIs की बढ़ती रुचि के कारण, पारंपरिक डिपॉजिट योजनाओं को NRIs की पूंजी के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.