चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में NRI डिपॉजिट का नेट इनफ्लो घटकर **$2.78 बिलियन** पर आ गया है, जो पिछले साल के मुकाबले **22%** कम है। हालांकि, जून 2026 में RBI द्वारा शुरू की गई फॉरेक्स-स्वैप सुविधा के कारण FCNR(B) डिपॉजिट में **124%** का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है।
डिपॉजिट का बदलता गणित
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून 2026 के बीच NRI डिपॉजिट में नेट इनफ्लो $2.78 बिलियन रहा, जो पिछले साल इसी दौरान $3.61 बिलियन था। कुल इनफ्लो में कमी के बावजूद, डिपॉजिट के प्रकार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
FCNR(B) में आई तेजी
इस तिमाही में FCNR(B) डिपॉजिट $1.73 बिलियन तक पहुंच गए, जो पिछले साल की समान अवधि में $774 मिलियन थे। इस 124% की जोरदार बढ़त के पीछे RBI की 8 जून 2026 को शुरू की गई खास फॉरेक्स-स्वैप सुविधा थी। इस सुविधा ने कमर्शियल बैंकों को विदेशी मुद्रा के बदले भारतीय रुपया जुटाने में मदद की, जिससे लिक्विडिटी मैनेज करना आसान हो गया।
बैंकिंग सेक्टर और लिक्विडिटी पर प्रभाव
यह कदम देश के फॉरेक्स रिजर्व को मजबूत करने और ट्रेड डेफिसिट के दबाव को कम करने के लिए उठाया गया था। हालांकि 31 अगस्त 2026 को यह स्वैप विंडो बंद हो गई है, लेकिन जून अंत तक कुल आउटस्टैंडिंग NRI डिपॉजिट का आंकड़ा $168.51 बिलियन के मजबूत स्तर पर बना हुआ है।
निवेशकों के लिए जोखिम और चुनौतियां
अब बाजार की नजरें इस बात पर हैं कि स्वैप सुविधा खत्म होने के बाद बैंक अपनी लिक्विडिटी को कैसे संभालते हैं। बैंकों के लिए नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव एक मुख्य चिंता का विषय है। इसके अलावा, लंबी अवधि के फॉरेक्स डिपॉजिट और लेंडिंग पोर्टफोलियो के बीच एसेट-लायबिलिटी मिसमैच का जोखिम भी बना हुआ है। आने वाले समय में ग्लोबल इंटरेस्ट रेट और महंगाई के ट्रेंड तय करेंगे कि NRI के लिए ये डिपॉजिट प्रोडक्ट्स कितने आकर्षक बने रहेंगे।
