सरकार की ओर से शुरू की गई NPS Vatsalya स्कीम नाबालिगों के लिए एक बेहतरीन लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन टूल है। अब तक इसमें **4.9 लाख** से अधिक बच्चे एनरोल हो चुके हैं। निवेश करने से पहले इसके मार्केट-लिंक्ड रिस्क और विड्रॉल की सीमाओं को समझना बहुत जरूरी है।
निवेश का नया तरीका
NPS Vatsalya स्कीम का मकसद बच्चों के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग की नींव बचपन से ही रखना है। सितंबर 2026 तक, इस स्कीम में 4.9 लाख से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं और इसका टोटल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹403 करोड़ के पार पहुंच गया है। PFRDA की निगरानी में चल रही यह स्कीम कंपाउंडिंग की ताकत का लाभ उठाने का मौका देती है।
कम निवेश में बड़े फायदे
इस स्कीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सालाना केवल ₹250 का मिनिमम इन्वेस्टमेंट करना होता है। इसमें 10 रजिस्टर्ड पेंशन फंड मैनेजर मौजूद हैं, जो बच्चों के भविष्य के लिए इक्विटी और सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश का विकल्प देते हैं।
निकासी (Withdrawal) के नियम
पैसे निकालने के नियम काफी सख्त हैं। आप कुल योगदान का 25% हिस्सा केवल एजुकेशन, मेडिकल इमरजेंसी या दिव्यांगता जैसी स्थितियों में ही निकाल सकते हैं। नए नियमों के मुताबिक, 18 साल की उम्र से पहले 2 बार और 18 से 21 साल के बीच 2 बार निकासी की जा सकती है।
18 साल के बाद क्या होगा?
बच्चे के 18 साल के होते ही 3 साल का ट्रांजिशन पीरियड शुरू होता है, जिसमें दोबारा KYC की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। 21 साल की उम्र तक आते-आते यह तय करना होता है कि खाता जारी रखना है या NPS ऑल सिटीजन मॉडल में शिफ्ट होना है। अगर कॉर्पस ₹8 लाख या उससे कम है, तो पूरा पैसा निकाला जा सकता है, वरना इसके बाद स्टैंडर्ड NPS गाइडलाइंस लागू होती हैं।
रिस्क को समझें
याद रखें, यह फिक्स्ड डिपॉजिट नहीं है, बल्कि मार्केट-लिंक्ड निवेश है। यानी इसमें रिटर्न की गारंटी नहीं होती और बाजार के उतार-चढ़ाव का असर आपके कॉर्पस पर पड़ सकता है। धारा 80CCD(1B) के तहत टैक्स बेनिफिट तो मिलता है, लेकिन इसे एक लॉन्ग-टर्म रिटायमेंट फंड के रूप में ही देखें, न कि इमरजेंसी फंड के रूप में।
