NPS Vatsalya: बच्चों के भविष्य के लिए पेरेंट्स ऐसे करें निवेश, जानें स्कीम के फायदे

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AuthorMehul Desai|Published at:
NPS Vatsalya: बच्चों के भविष्य के लिए पेरेंट्स ऐसे करें निवेश, जानें स्कीम के फायदे

सरकार ने 'NPS Vatsalya' नाम की नई पेंशन स्कीम लॉन्च की है, जिससे पेरेंट्स अपने बच्चों के लिए एक बड़ा फंड (Corpus) तैयार कर सकते हैं। इसमें मार्केट-लिंक्ड रिटर्न (Market-linked returns) और सेक्शन 80CCD(1B) के तहत टैक्स छूट मिलती है। बच्चे के 18 साल के होते ही यह अकाउंट ऑटोमेटिकली स्टैंडर्ड Tier-I NPS अकाउंट में बदल जाएगा।

क्या है NPS Vatsalya स्कीम?

केंद्र सरकार ने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक नई स्कीम 'NPS Vatsalya' लॉन्च की है। यह स्कीम पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) द्वारा मैनेज की जाती है। इसका खास मकसद नाबालिगों के लिए एक लंबी अवधि का फंड (Corpus) तैयार करना है, जिसमें माता-पिता या कानूनी अभिभावक उनके नाम पर निवेश कर सकते हैं। खास बात यह है कि 18 साल से कम उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक, जिसमें NRI और OCI भी शामिल हैं, इस स्कीम में सब्सक्राइबर बन सकता है।

कैसे काम करेगा ये निवेश?

NPS Vatsalya की एक खास बात यह है कि यह आपको मार्केट-लिंक्ड रिटर्न (Market-linked returns) देता है, जो आपके चुने हुए पेंशन फंड मैनेजर के परफॉरमेंस पर निर्भर करता है। पेरेंट्स सिर्फ ₹250 जैसी छोटी राशि से भी अकाउंट खोल सकते हैं। निवेश की कुल राशि की कोई ऊपरी सीमा नहीं है, जिससे आप अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार प्लानिंग कर सकते हैं। आप eNPS पोर्टल पर ऑनलाइन या पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (PoPs) पर ऑफलाइन तरीके से भी कंट्रीब्यूशन कर सकते हैं।

अभिभावकों के लिए टैक्स के फायदे

इस स्कीम का एक बड़ा आकर्षण है टैक्स में मिलने वाली छूट। सेक्शन 80CCD(1B) के तहत, अभिभावक द्वारा बच्चे के NPS Vatsalya अकाउंट में किए गए कंट्रीब्यूशन पर ₹50,000 तक की अतिरिक्त टैक्स छूट क्लेम की जा सकती है। यह छूट सेक्शन 80C के तहत मिलने वाले ₹1.5 लाख के कॉमन लिमिट के ऊपर है। यह उन पेरेंट्स के लिए एक बेहतरीन जरिया है जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए सेविंग के साथ-साथ टैक्स बचाने की भी सोचते हैं।

पैसे कब निकाल सकते हैं?

बच्चे के 18 साल के होने से पहले कुछ खास मौकों पर ही आंशिक निकासी (Partial withdrawal) की अनुमति है। जैसे बच्चे की पढ़ाई, गंभीर बीमारी या दिव्यांगता की स्थिति में। ऐसे मामलों में, कुल कंट्रीब्यूशन का 25% तक निकाला जा सकता है, लेकिन यह सुविधा अधिकतम दो बार ही मिलेगी। जब सब्सक्राइबर 18 साल का हो जाता है, तो यह अकाउंट ऑटोमेटिकली एक रेगुलर NPS Tier-I अकाउंट में बदल जाता है। अगर इस समय कॉर्पस ₹2.5 लाख या उससे कम है, तो पूरी राशि निकाली जा सकती है। लेकिन अगर कॉर्पस इस सीमा से ज्यादा है, तो कम से कम 80% राशि का इस्तेमाल पेंशन खरीदने (Annuity) के लिए करना होगा और बाकी 20% एकमुश्त (Lump sum) निकाली जा सकती है।

निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

चूंकि यह एक मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट है, इसलिए फाइनल कॉर्पस पूरी तरह से चुने गए पेंशन फंड मैनेजर के परफॉरमेंस पर निर्भर करेगा। निवेशकों को विभिन्न पेंशन फंड मैनेजर्स के एक्सपेंस रेश्यो (Expense Ratios) और पिछले रिकॉर्ड पर नियमित रूप से नजर रखनी चाहिए। यह स्कीम लंबी अवधि के लॉक-इन के साथ आती है और रिटायरमेंट-फोक्स्ड Tier-I अकाउंट में बदल जाती है, इसलिए पेरेंट्स को इसे बच्चे के भविष्य के लिए एक लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के तौर पर देखना चाहिए, न कि शॉर्ट-टर्म सेविंग टूल की तरह।

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